रिटायर्ड सेना प्रमुख ने कहा कि 'आज युद्ध का तरीका बदल गया है और पारंपरिक युद्ध की जगह साइबर युद्ध, डिजिटल, स्पेस और इंफोर्मेशन, सर्विलांस जैसे क्षेत्र उभरे हैं। हमें जरूरत है कि हम जल्द से जल्द इन क्षेत्रों को अपने सैन्य एप्लीकेशन में शामिल करें और हम कर भी रहे हैं।'
जनरल (रिटायर्ड) मनोज पांडे ने जब थल सेना अध्यक्ष का पद संभाला था तो उन्हें चीन के साथ सीमा पर तनाव विरासत में मिला था। उस दौरान के अपने अनुभव पर अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि 'सुरक्षा चुनौतियां हमेशा ही रहती हैं और अलग-अलग तरह की होती हैं, जिसमें आंतरिक और बाहरी दोनों चुनौतियां शामिल हैं, लेकिन हमारी सेना एक बड़ा ही संगठित बल है, जिसमें एक व्यवस्था है और उसी के अनुसार ही सारे काम होते हैं। हमें हमारे जवानों के समर्पण, हिम्मत पर पूरा भरोसा है, जिसके चलते मुश्किल से मुश्किल परेशानी में भी हमें विश्वास रहा कि हम इससे निपटने में सक्षम हैं। जो भी खतरे हैं, हम उनका सामना करने के लिए कार्यरत हैं।'
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पाकिस्तान की चुनौती पर क्या बोले पूर्व आर्मी चीफ
पाकिस्तान की चुनौती के सवाल पर मनोज पांडे ने कहा कि 'बाहरी चुनौतियों की बजाय हम अपनी तैयारियों पर ज्यादा फोकस करते हैं और हमारी सेना किसी भी चुनौती से निपटने में पूरी तरह से सक्षम है।' पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने हाल ही में टू नेशन थ्योरी का समर्थन किया था। जब इसे लेकर सवाल किया गया तो पूर्व सेना प्रमुख ने पाकिस्तानी सेना के चीफ के बयान पर टिप्पणी करना भी जरूरी नहीं समझा और सवाल को टाल दिया। रिटायर्ड सेना प्रमुख ने कहा कि 'आज युद्ध का तरीका बदल गया है और पारंपरिक युद्ध की जगह साइबर युद्ध, डिजिटल, स्पेस और इंफोर्मेशन, सर्विलांस जैसे क्षेत्र उभरे हैं। हमें जरूरत है कि हम जल्द से जल्द इन क्षेत्रों को अपने सैन्य एप्लीकेशन में शामिल करें और हम कर भी रहे हैं।'
सेना के हथियारों में आया बड़ा बदलाव
भारतीय सेना के हथियारों के बदलाव को लेकर पूछे गए सवाल पर पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना के हथियारों में बड़ा बदलाव हुआ है। पहले के हथियारों की तुलना में आज के सर्विलांस, निजी हथियार आदि की गुणवत्ता में काफी बदलाव आया है। पहले हमें इन सभी चीजों का आयात करते थे, फिर चाहे वो सर्विलांस हो, कम्युनिकेशन वेपन हों या फिर पर्सनल हथियार। अब देश में ही आधुनिक हथियार बन रहे हैं।