विवादित कट्टरपंथी प्रचारक जाकिर नाईक के मलयेशिया से प्रत्यर्पण का मामला अब वहां भी जोर पकड़ने लगा है। मौजूदा डेमोक्रेटिक एक्शन पार्टी (डीएपी) के एक नेता ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने और दो अन्य मंत्रियों ने प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद के उस बयान के बाद कैबिनेट की बैठक में जाकिर नाईक के मुद्दे को उठाया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय मुस्लिम प्रचारक को उसके देश में निर्वासित नहीं किया जाएगा।
मलयेशिया के मानव संसाधन मंत्री एम कुलसेगरन ने यह भी कहा कि वह इस मामले को भारतीय नेतृत्व के सामने भी उठाएंगे। इस विषय पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'क्या जाकिर नाईक के प्रत्यर्पण पर मलयेशिया सरकार के रुख से दोनों देशों के बीच संबंध बिगड़ सकते हैं?'
सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कुल 2682 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। 74.91 फीसदी (2009 वोट) पाठकों ने माना कि जाकिर नाईक के प्रत्यर्पण पर मलयेशिया सरकार के रुख से दोनों देशों के बीच संबंध बिगड़ सकते हैं। जबकि 25.09 फीसदी (673 वोट) पाठकों ने माना कि जाकिर नाईक के प्रत्यर्पण पर मलयेशिया सरकार के रुख से दोनों देशों के बीच संबंध नहीं बिगड़ेंगे।