भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी (फाइल फोटो)
भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) ने अघोषित रूप से सक्रिय राजनीति की एक उम्र या समय सीमा तय कर दी है। पार्टी ने इस बार के लोकसभा चुनाव में पार्टी के कद्दावर नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी का टिकट काट दिया है। इसके साथ ही पार्टी ने हिमाचल प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार का टिकट भी काट दिया।। बता दें कि 75 वर्ष पार के इन नेताओं का टिकट काटा जाना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले पार्टी ने पिछले लोकसभा चुनाव में भी कुछ ऐसा ही किया था। हालांकि इस बार भी अलग-अलग दलों से कई उम्रदराज प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में हैं।
गौरतलब है कि पिछले लोकसभा चुनाव में 75 साल का जो कट ऑफ चुनाव लड़ने के वक्त रखने की कोशिश हुई और जिसे सरकार के गठन के वक्त भी लागू किया गया था। मई, 2014 में जब नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा लोकसभा चुनाव जीत गई तो सरकार के गठन से पहले यह बिल्कुल साफ हो गया था कि 75 से अधिक उम्र के किसी भी नेता को सरकार में शामिल नहीं किया जाएगा।
बता दें कि इसके बाद पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा भी इसी नियम के शिकार हुए थे। उन्हें न तो चुनाव में टिकट और न ही सरकार में जगह नहीं दी गई थी। कहा जाता है कि गुजरात में आनंदीबेन पटेल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा भी इसी नियम की वजह से देना पड़ा था। साथ ही केंद्र की मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे कलराज मिश्र को इसी वजह से मंत्री पद छोड़ना पड़ा था। वहीं, नजमा हेपतुल्ला को भी बढ़ती उम्र के कारण केंद्रीय मंत्रालय से ड्रॉप कर दिया गया था। हालांकि, भाजपा में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा इसके अपवाद हैं। इन्हें पार्टी ने कर्नाटक में अभी सक्रिय राजनीति में रहने का निर्देश दे रखा है।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'राजनेताओं के लिए सेवानिवृत्ति की उम्र कितनी होनी चाहिए?'
पोल के जवाब में दस हजार से अधिक पाठकों ने हिस्सा लिया। इनमें 75.01 फीसदी पाठकों ने पोल पर अपनी राय देते हुए कहा कि राजनेताओं के लिए सेवानिवृत्ति की उम्र 70 वर्ष होनी चाहिए, जबकि 17.96 फीसदी पाठकों ने माना कि 1076 राजनेताओं के लिए सेवानिवृत्ति की उम्र 75 वर्ष होनी चाहिए। वहीं 7.03 फीसदी पाठकों ने कहा कि राजनेताओं के लिए सेवानिवृत्ति की उम्र 80 वर्ष होनी चाहिए।