पिछले दो दिनों से महाराष्ट्र जातीय हिंसा की आग में झुलस रहा है। महाराष्ट्र के पुणे में दलितों और मराठा संगठन के लोगों के बीच सोमवार को हुई झड़प ने बड़ी हिंसा का रूप धर लिया और मंगलवार को भी जारी रहा।
पुणे से निकली आग ने मुंबई को बुरी तरह प्रभावित किया जिसके कारण हड़पसर व फुरसुंगी में बसों पर पथराव और तोड़-फोड़ की गई जबकि कई जगह आगजनी की घटना भी देखने को मिली। धीरे-धीरे मामला तूल पकड़ता गया और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में फैल गया। हिंसक घटनाओं को देखते हुए धारा-144 लागू कर दी गई है।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या हिंसक घटनाओं पर राजनीति की रोटियां सेंकना सही है?'
पोल के जवाब में हमें कुल 4,135 वोट मिले। इनमें 80.29 फीसदी (3320 वोट) पाठकों ने सवाल के जवाब में असहमति जताते हुए माना कि हिंसक घटनाओं पर राजनीतिक रोटियां सेंकना सही नही है, जबकि 18.11 फीसदी (749 वोट) पाठकों ने सवाल के जवाब में सहमति जताते हुए कहा कि हिंसक घटनाओं पर राजनीति करना सही है।। वहीं 1.6 फीसदी (66 वोट) पाठकों ने इस मुद्दे पर कोई राय जाहिर करने में असमर्थता जताई।