शुक्रवार ( 12 जनवरी) को चीफ जस्टिस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जजों द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की कार्यशैली पर सवाल उठाने के बाद से हंगामा मचा हुआ है। जिसके बाद शनिवार को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने अलग-अलग बैठक कर सीजेआई दीपक मिश्रा और सुप्रीम कोर्ट के चार जजों के बीच पैदा हुए मतभेदों की खाई को पाटने दिशा में कई कदम उठाए गए।
इस दौरान एससीबीए के अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा था कि हमने राहुल गांधी और अन्य राजनीतिक दलों को न्यायपालिका के बारे में बात करने का मौका दिया है। यह सचमुच में अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। इस मुद्दे के राजनीतिकरण की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, ‘बार काउंसिल की तरफ से हम सभी राजनीतिक दलों से अनुरोध करते हैं कि अब भविष्य में वे इस मामले में संयम बरतें।
हम नहीं चाहते हैं कि न्यायपालिका की छवि पर धब्बा लगे। लोगों का न्यायपालिका में दृढ़ विश्वास है।’ मिश्रा ने कहा कि हम सरकार के उस रुख का स्वागत करते हैं जिसमें उसने कहा था कि यह न्यायपालिका का आंतरिक मसला है।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या सुप्रीम कोर्ट के मामलों में राजनीति करना उचित है?'
पोल के जवाब में हमें कुल 3,283 वोट मिले। इनमें 79.35 फीसदी (2605 वोट) पाठकों ने सवाल के जवाब में असहमति जताते हुए माना कि सुप्रीम कोर्ट के मामलों में राजनीति नहीं करनी चाहिए, जबकि 20.65 फीसदी (678 वोट) पाठकों ने सवाल के जवाब में हां में जवाब दिया।