रॉफेल लड़ाकू विमान की खरीद को लेकर विपक्षी पार्टिया लगातार केंद्र सरकार से मामले की जानकारी को सार्वजनिक करने की मांग कर रही हैं। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी राफेल सौदे में गंभीर हेराफेरी का आरोप लगाते हुए सरकार से विमान की खरीद का ब्योरा मांगा है। हालांकि सरकार ने 58 हजार करोड़ के 36 राफेल जेट के सौदे के संबंध में विपक्ष के आरोपों को ‘निराधार’ बताया। सरकार ने कहा था कि इस संबंध में विवरण के खुलासे की मांग अव्यावहारिक है और ऐसा करना राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने के बराबर होगा।
सरकार की तरफ से कहा गया था कि राफेल सौदे के मूल्य और ब्योरे को सार्वजनिक किए जाने की मांग की जा रही है जो मुमकिन नहीं है। गोपनीयता की शर्तों के मुताबिक, यूपीए सरकार ने भी कई रक्षा सौदों का ब्योरा सार्वजनिक करने में असहमति जताई थी। संसद में पूछे गए सवालों पर भी यही रुख अपनाया था। सरकार ने कहा था कि राफेल विमान की मोटे तौर की लागत की जानकारी संसद को दी जा चुकी है। आइटम के लिहाज से लागत और अन्य सूचनाएं बताने पर वे सूचनाएं भी आम हो जाएंगी, जिनके तहत इन विमानों का कस्टमाइजेशन और वेपन सिस्टम से लैस किया जाएगा।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या सरकार को विपक्ष की मांग मानते हुए राफेल डील की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए?'
पोल के जवाब में हमें कुल 3,593 वोट मिले। इनमें 50.26 फीसदी (1,806 वोट) पाठकों ने सवाल के जवाब में असहमति जताते हुए माना कि सरकार को राफेल डील की जानकारी सार्वजनिक नहीं करनी चाहिए, जबकि 49.74 फीसदी (1,787 वोट) पाठकों ने कहा कि सरकार को राफेल डील की जानकारी सार्वजनिक कर देनी चाहिए।