कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच चल रहे कावेरी नदी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुना दिया। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अमिताव रॉय और ए.एम. खानविलकर की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि नदी पर कोई राज्य दावा नहीं कर सकता है।
कोर्ट ने तमिलनाडु के हिस्से का पानी घटाकर 177.25 टीएमसी कर दिया है। इससे कर्नाटक को 14.75 टीएमसी पानी का फायदा मिला है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया कि कावेरी के जल में कर्नाटक का हिस्सा इस तथ्य को देखकर बढ़ाया जा रहा है कि बीते दिनों में बेंगलुरु में पीने के पानी की मांग बढ़ी है। साथ ही इंडस्ट्रियल इलाकों में भी पानी की खपत में इजाफा देखा गया है। माना जा रहा है कि शीर्ष अदालत के इस फैसले का असर कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है।
इस विषय पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'क्या कावेरी नदी विवाद का असर वहां होने वाले विधानसभा चुनावों पर भी पड़ेगा?' सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कुल 1353 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। 76.13 फीसदी (1030 वोट) ने माना कि कावेरी नदी विवाद का असर वहां होने वाले विधानसभा चुनावों पर भी पड़ेगा। जबकि 23.87 फीसदी (323) पाठकों ने कावेरी नदी विवाद का असर वहां होने वाले विधानसभा चुनावों पर नहीं पड़ेगा।