नोटबंदी के दौर में आयकर विभाग समेत बड़े विभाग लगातार छापेमारी कर रहे हैं। हाल ही में विभाग ने पहले चेन्नई फिर दिल्ली और अब जयपुर में छापा मारकर करोड़ों के नए नोट जब्त किए। चौंका देने वाली बात है कि काले धन को सफेद करने में सरकारी कर्मचारी समेत बैंक कर्मचारी भी मदद कर रहे हैं।
इस बीच सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या प्रधानमंत्री मोदी की नोटबंदी जैसी महत्वाकांक्षी योजना को बैंक और अन्य सरकारी कर्मचारी पलीता लगाने में जुटे हुए हैं? ये सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आम आदमी बैंक और एटीएम के बाहर कैश के लिए घंटों लाइन में लग रहा है और वहीं कुछ लोगों से नए नोटों की गड्डियां बरामद की जा रही है। आखिर इन लोगों के पास नए नोटों के बंडल कैसे पहुंच रहे हैं?
आयकर विभाग और पुलिस के छापे में रोज रोज पकड़ी जा रही नए नोटों की करोड़ों की खेप आखिर आ कहां से रही है? निश्चित रूप से यह सवाल आम आदमी के साथ ही सरकार को भी परेशान कर रहा होगा। सवाल इसलिए भी है कि नोटबंदी के बाद फुलप्रूफ व्यवस्था का दावा कर रही सरकार का मैनेजमेंट आखिर कहां फेल हो रहा है?
नए नोटों की हेराफेरी पर अमर उजाला ने पोल किया। पोल में सवाल पूछा, 'आम आदमी की जेब खाली और रसूखदारों की भरी तिजोरियां। क्या नोटबंदी असफल साबित हो रही है?' पोल में कुल 10,184 पाठकों ने हिस्सा लिया। सबसे अधिक 59.69 फीसदी यानि 6,079 पाठकों ने माना नोटों को लेकर हो रही हेराफेरी से नोटबंदी असफस साबित हो रही है। 37.76 फीसदी यानि 3,845 पाठकों ने मोदी सरकार की नोटबंदी इन धांधलियों से नहीं डगमगाएगी। वहीं 2.55 फीसदी यानि 260 पाठकों ने कह नहीं सकते विकल्प को चुना।