उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के सभी पार्टियों ने कमर कस ली है। इस बीच चुनावी साल में अयोध्या फिर सुर्खियों में छा गया है। राम के नाम पर जनता का दिल जीतने की कोशिशों में तेजी देखी जा रही है। एक तरफ जहां केंद्र सरकार रामायण सर्किट के लिए खजाना खोल रही है, वहीं अखिलेश सरकार भी राम के नाम पर भाजपा को वॉकओवर देने को तैयार नहीं है।
मंगलवार को केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा अयोध्या आ रहे हैं, तो सोमवार को ही अखिलेश यादव कैबिनेट ने रामनगरी के रामकथा संकुल में प्रस्तावित रामलीला थीम पार्क में काम शुरू करने का फैसला किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दशहरे पर लखनऊ के ऐशबाग रामलीला मैदान में जय श्रीराम का उद्घोष किया था, वह केवल रामलीला तक सीमित नहीं था। सियासी हल्कों में इसके दूरगामी अर्थ निकाले जा रहे हैं।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने अपने पाठकों की राय जानने के लिए सवाल किया कि क्या उत्तर प्रदेश में चुनाव का मुख्य मुद्दा विकास नहीं धर्म होगा? इसके लिए पाठकों को तीन विकल्प दिए गए, जिसमें पहला है हां, दूसरा नहीं और तीसरा कह नहीं सकते। इस पोल में कुल 5,039 पाठकों ने हिस्सा लिया है।
सबसे अधिक पाठकों ने पहले विकल्प को चुना है, जिसमें 58.50 फीसद यानी 2,948 का मानना है कि यूपी चुनाव में मुख्य मुद्दा विकास नहीं बल्कि धर्म होगा। 36.93 फीसद यानी 1,861 पाठकों ने दूसरे विकल्प को चुना है जिनका मानना है कि चुनाव में धर्म नहीं विकास का मुद्दा उठाया जाएगा, वहीं 4.56 फीसद यानी 230 पाठकों ने कुछ कह नहीं सकते को चुना है।