आईसीएसई बोर्ड की एक किताब विवादों में आ गई है। इस किताब में प्रदूषण के चैप्टर में छपी तस्वीर में ध्वनि प्रदूषण के लिए मस्जिद को सोर्स के तौर पर दिखाया गया है। ये किताब छठीं कक्षा में पढ़ाई जा रही है। किताब की ये तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद किताब के प्रकाशक ने फोटो को अगले संस्करण से हटाने की बात कही है।
इसी म़ुद्दे को लेकर अमर उजाला ने पाठकों के राय लेने के लिए पोल का आयोजन किया। अमर उजाला ने पोल के माध्यम से पाठकों से सवाल पूछा कि 'क्या स्कूली किताबों में धर्म को लेकर इस प्रकार की टिप्पणियां करना चाहिए?'
पोल में कुल 12,196 पाठकों ने हिस्सा लिया। पोल में हिस्सा लेने वाले कुल पाठकों में से सर्वाधिक 62.04 प्रतिशत यानि कि कुल 7567 पाठकों ने माना कि स्कूली किताबों में धर्म को लेकर टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए। 4331 पाठकों यानि कि 35.51 प्रतिशत पाठकों का मानना है कि स्कूली किताबों में धर्म को लेकर मजहबी टिप्पणियां करनी चाहिए। 4331 पाठकों ने हां में जवाब दिया, जबकि 2.44% पाठकों ने अपनी कोई राय नहीं दी। इसके लिए 298 पाठकों ने वोट किया।