राहुल गांधी ने अकेले ही गुजरात में अपना नेतृत्व दिखाया है। वहीं पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद जैसे कांग्रेस में नई जान सी आ गई है।राहुल गांधी के कंधे का बोझ अब तक के सभी कांग्रेस अध्यक्षों से अलहदा है।
यहां तक कि अपनी मां सोनिया गांधी के बोझ से भी। सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष का पदभार संभाला था तब कांग्रेस बाहरी ताकतों की बजाय अपने भीतर के कांग्रेसियों से जूझ रही थी। तब कांग्रेस के पास पार्टी छोड़कर गए नेताओं को वापस लाने, बिखरी ताकत इकट्ठा करने की चुनौती थी।
हालांकि वर्तमान में पार्टी के भीतर भले ही कोई चुनौती न हो लेकिन पार्टी के बाहर स्थिति विकट है।
इस विषय पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'क्या मोदी और भाजपा का सामना कर सकेगी 'राहुल की कांग्रेस'? सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कुल 14624 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। 42.13 फीसदी (6161 वोट) ने माना कि राहुल की कांग्रेस मोदी और भाजपा का सामना कर सकती है। जबकि 54.86 फीसदी पाठकों (8023 वोट) ने माना ऐसा नहीं है। वहीं, 3.01 फीसदी (440 वोट) पाठकों ने कह नहीं सकते विकल्प को चुना।