चुनाव पास आते ही राजनीतिक दल जिस काम में जुट जाते हैं वह है भाषण और रैलियों की तैयारी। इनमें जो चुनाव लड़ रहे हैं वह तो भाग लेते ही हैं। साथ ही ऐसे नेता जो चुनाव नहीं लड़ रहे हैं वह भी प्रत्याशियों के समर्थन में भाषण और रैलियां करते हैं। ऐसे में कई बार सवाल उठता है कि जब फलां नेता चुनाव ही नहीं लड़ रहा तो उसके भाषण देने या रैली करने का का मतलब है।
इसी बारे में अमर उजाला ने अपने पाठकों से सवाल पूछा था कि क्या चुनाव न लड़ने वाले नेताओं को भाषण और रैलियां आयोजित करनी चाहिए? इसके जवाब में कुल 3871 वोट पड़े। इनमें 41.26 फीसदी लोगों ने कहा कि चुनाव न लड़ने वाले नेता भी भाषण और रैलियों में शामिल हो सकते हैं। वहीं, 58.74 फीसदी लोगों ने कहा कि रैलियों और भाषणों में वही शामिल हों जो चुनाव लड़ रहे हैं।