पेट्रोल डीजल की बढ़ते दाम इन दिनों आम नागरिकों के लिए सिरदर्द का विषय है। हम सभी चाहते हैं किसी भी तरह तेल के दामों में गिरावट आनी चाहिए। वहीं भाजपा अमित शाह ने संकेत दिए हैं कि आगे चलकर केंद्र सरकार को पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए राज्यों के साथ मिलकर काम करना चाहिए।
एसोचैम के सचिव जनरल डीएस रावत ने कहा कि पेट्रोल तथा डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती से उपभोक्ताओं को अस्थायी राहत मिल सकती है, हालांकि स्थायी समाधान ईंधन को जीएसटी के दायरे में लाना ही है, जो तभी संभव है, जब केंद्र तथा राज्य साथ मिलकर ईंधन पर अपनी निर्भरता में उल्लेखनीय कमी लाएं।
इस विषय पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'क्या पेट्रोल-डीजल के दामों को जीएसटी के दायरे में लाने से इनकी कीमतें नियंत्रित हो सकेंगी?' सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कुल 3182 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। 80.01 फीसदी (2546 वोट) पाठकों ने माना कि पेट्रोल-डीजल के दामों को जीएसटी के दायरे में लाने से इनकी कीमतें नियंत्रित हो सकेंगी। जबकि 19.99 फीसदी (636) पाठकों ने माना कि पेट्रोल-डीजल के दामों को जीएसटी के दायरे में लाने से इनकी कीमतें नियंत्रित नहीं हो सकेंगी।