8 नवंबर को नोटबंदी के फैसले के बाद विपक्ष सरकार पर लगातार यह आरोप लगा रहा है कि उसका फैसला लोगों के विरोध में है। लोग परेशान हो रहे हैं और सरकार पर इसका कोई फर्क नहीं है। इस मसले पर संसद का पूरा शीतकालीन सत्र भेंट चढ़ गया।
नोटबंदी के फैसले के बाद देश में हुए कुछ उपचुनावों और निकाय चुनावों का ट्रेंड देखें तो विपक्ष के जनविरोधी होने के आरोप की हवा निकलती दिखती है। नोटबंदी के फैसले के बाद देश में जहां-जहां चुनाव हुए हैं वहां बीजेपी का प्रदर्शन पहले की तुलना में सुधरा है। हालांकि यह चुनाव बहुत ही स्थानीय स्तर के थे लेकिन फिर भी इन चुनावों में बीजेपी की जीत यह संकेत करती है कि नोटबंदी का फैसला बीजेपी के खिलाफ ना जाकर उसके हक में जाता दिख रहा है।
उपचुनाव और निकाय चुनावों के परिणाम पर अमर उजाला डॉट कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'निकाय चुनावों में भाजपा की जीत को नोटबंदी पर 'जनता की मोहर' मान सकते हैं?'। इस सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कुल 10,297 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। पोल में सबसे अधिक 75.44 फीसदी यानि 7768 पाठकों का मानना है कि निकाय चुनावों में भाजपा की जीत को नोटबंदी पर 'जनता की मोहर' हैं। 22.73 फीसदी यानि 2340 पाठकों ने कहा कि निकाय चुनावों में भाजपा की जीत को नोटबंदी पर 'जनता की मोहर' कहना लगता है। वहीं, 1.84 फीसदी यानि 189 पाठकों ने कह नहीं सकते विकल्प को चुना।