शुक्रवार को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को बड़ा झटका देते हुए उसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी फंडिंग करने वाले देशों की निगरानी सूची (ग्रे लिस्ट) में शामिल करने का फैसला लिया। बता दें कि दुनिया भर में मनी लांड्रिंग की निगरानी करने वाले एफएटीएफ की बैठक में चीन, तुर्की और सऊदी अरब ने पाकिस्तान का बचाव करने की तमाम कोशिश की लेकिन भारत और अमेरिका के संयुक्त अभियान के सामने उनकी एक न चली। इससे पहले पाकिस्तान को 2015 तक तीन साल के लिए इस सूची में रखा गया था।
एफएटीएफ के इस फैसले के बाद पाक को अब जून में आधिकारिक रूप से इस सूची में शामिल कर दिया जाएगा। तीन दिन से पेरिस में चल रही इस बैठक में पाकिस्तान के खिलाफ यह कदम अमेरिकी प्रस्ताव के बाद उठाया गया। चीन ने नामांकन के लिए अपनी आपत्ति वापस ले ली जिसके बाद इस प्रस्ताव को एफएटीएफ ने 36-1 के अंतर से पारित कर दिया।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में नाम आने के बाद क्या अब पाकिस्तान आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा?'
पोल के जवाब में हमें कुल 1,761 वोट मिले। इनमें 19.59 फीसदी (345 वोट) पाठकों ने सवाल के जवाब में सहमति जताते हुए माना कि एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में नाम आने के बाद अब पाकिस्तान आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा, जबकि 80.41 फीसदी (1,416 वोट) पाठकों ने सवाल के जवाब में असहमति जताते हुए कहा कि एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में नाम आने के बावजूद पाकिस्तान आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं करेगा।