सोमवार (22 जनवरी) को पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ साथ कराने के सवाल पर संसदीय समिति दो धड़ों में बंट गई। विपक्ष ने एक देश एक चुनाव के सवाल पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए तो राजग सदस्यों ने इसे राष्ट्रहित के लिए जरूरी बताया। बहरहाल इस मामले में आम राय नहीं बनने के कारण कमेटी की ओर से रिपोर्ट पेश करने में देरी हो सकती है। सरकार की मंशा इसी बजट सत्र में समिति की रिपोर्ट पर संसद में चर्चा कराने की थी।
भाजपा के राज्यसभा सांसद भूपेंद्र यादव की अगुवाई वाली संसदीय समिति की सोमवार को हुई बैठक में इस सवाल पर सदस्यों के बीच तीखी नोंकझोंक हुई।
सदस्यों का कहना था कि अलग-अलग राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने में इतना अधिक अंतर है कि इस प्रस्ताव पर आगे ही नहीं बढ़ा जा सकता। हालांकि सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से खुद समिति के अध्यक्ष यादव, प्रभात झा, मीनाक्षी लेखी, राजीव प्रताप रूडी ने प्रस्ताव को देशहित में बताते हुए इसका समर्थन किया।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या आप मानते हैं, लोकसभा-विधानसभा चुनाव साथ कराने से देश की राजनीतिक व्यवस्था में सुधार आएगा?'
पोल के जवाब में हमें कुल 5,854 वोट मिले। इनमें 76.67 फीसदी (4,488 वोट) पाठकों ने माना कि लोकसभा-विधानसभा चुनाव साथ साथ कराने से देश की राजनीतिक व्यवस्था में सुधार आएगा, जबकि 23.33 फीसदी (1,366 वोट) पाठकों ने सवाल के जवाब में असहमति जताते हुए कहा कि लोकसभा-विधानसभा चुनाव साथ कराने से भी देश की राजनीतिक व्यवस्था में सुधार नहीं आएगा।