ईवीएम से चुनाव कराने को लेकर एक बार फिर बवाल खड़ा हो गया है। इस बार भारतीय मूल के लंदन में बैठे एक साइबर एक्सपर्ट ने ईवीएम हैक करने का दावा किया है। उसने यह भी दावा किया कि 2014 के चुनाव में भी ईवीएम को हैक कराया गया था। हालांकि चुनाव आयोग ने ऐसी किसी भी बात को मानने से इंकार कर दिया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है क्या वाकई ईवीएम में कोई गड़बड़ी हो सकती है? इसी के चलते आज हम आपको बताएंगे कि ईवीएम के अंदर क्या है और यह कैसे काम करती है।
चुनाव आयोग का कहना है कि ईवीएम को कोई भी हैक नहीं कर सकता है। आयोग के मुताबिक प्रत्येक ईवीएम का सीरियल नंबर होता है। सीरियल नंबर के जरिए ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर यह पता लगाया जा सकता है कि कौन सी मशीन कहां पर है। इसलिए आयोग के मुताबिक ईवीएम में गड़बड़ी की कोई संभावना ही नहीं है।
चुनाव आयोग का कहना है कि जैसे ही कोई मशीन खोलने का प्रयास करता है तभी ईवीएम निष्क्रिय हो जाती है। ईवीएम दो हिस्सों में बनी होती है। जिसका एक हिस्सा बैलेटिंग यूनिट का होता है जो कि मतदाताओं के लिए होता है।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या वाकई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को हैक करना संभव है?
पोल के जवाब में हमें कुल 5142 वोट मिले। इनमें 44.24 फीसदी (2275 वो़ट) पाठकों ने माना कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को हैक करना संभव है, जबकि 55.76 फीसदी (2867 वो़ट) पाठकों ने माना कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को हैक करना संभव नहीं है।