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पोल: सियासी लाभ के लिए कर्नाटक में लिंगायत समुदाय को अलग धर्म बनाने का फैसला लिया गया 

Tue, 20 Mar 2018 08:14 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने सोमवार (19 मार्च) को बड़ा फैसला लेते हुए लिंगायत और वीरशैव लिंगायत समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की सिफारिश केंद्र सरकार की। इस तरह यह समुदाय आधिकारिक रूप से हिंदू धर्म से अलग हो जाएगा। कांग्रेस चुनाव से पहले यह फैसला लेकर लिंगायत समुदाय को लुभाना चाहती है। वहीं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता एस प्रकाश ने इसे चुनावी रेवड़ी करार दिया। 

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बता दें कि कैबिनेट की बैठक के बाद कानून मंत्री टीबी जयचंद्र ने कहा था कि कैबिनेट ने राज्य की ओर इस मुद्दे पर गठित विशेषज्ञ कमेटी की सिफारिश मंजूर कर ली। काफी बहस और विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया है।

विशेषज्ञ समिति के मुताबिक लिंगायत समुदाय के लोग 12वीं शताब्दी के समाज सुधारक बासवेश्वर के विचारों को मानते हैं। जयचंद्र के मुताबिक इस फैसले से बाकी अल्पसंख्यकों के अधिकार और हितों पर असर नहीं पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में लिंगायत समुदाय का काफी प्रभाव है। राज्य में लिंगायत समुदाय की 18 फीसदी आबादी है। यह कर्नाटक की अगड़ी जातियों में शामिल है। 
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इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या राजनैतिक लाभ के लिए कर्नाटक में लिंगायत समुदाय को अलग धर्म बनाने का फैसला लिया गया है?'

पोल के जवाब में हमें कुल 2,436 वोट मिले। इनमें 80.21 फीसदी (1,954 वोट) पाठकों ने माना कि राजनैतिक लाभ के लिए कर्नाटक में लिंगायत समुदाय को अलग धर्म बनाने का फैसला लिया गया है, जबकि 19.79 फीसदी (482 वोट) पाठकों ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने लिंगायत समुदाय को अलग धर्म बनाने का फैसला राजनैतिक लाभ के लिए नहीं लिया है। 

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