मोदी सरकार की 500 और 1000 के नोटों को बंद करने की घोषणा के बाद से देशभर में नोटबंदी के कारण मरने वालों की तुलना उड़ी हमले में शहीद हुए सैनिकों से करने पर कांग्रेस संसद में बैकफुट पर आ गई है।
नोटबंदी के मुद्दे पर सरकार को संसद में घेरने का प्रयास कर रही कांग्रेस को राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद का बयान भारी पड़ता नजर आ रहा है। संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने के बाद से सरकार और विपक्ष में नोटबंदी को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
सदन में बोलते हुए विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने नोबटबंदी के बाद जान गंवाने वालों की तुलना उड़ी में शहीद हुए जवानों से की थी। गुलाम नबी आजाद ने चर्चा के दौरान कहा,' उड़ी हमले में इतने लोग शहीद नहीं हुए जितने सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद जान गंवा चुके हैं।'
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने आनलॉइन पोल किया। पोल में सवाल पूछा गया,'क्या नोटबंदी में मरने वालों की तुलना उड़ी हमले के शहीदों से करना सही है?' पोल में 9544 पाठकों ने हिस्सा लिया। सबसे ज्यादा 81.44% फीसदी यानी 7773 पाठकों ने कहा कि नोटबंदी में मरने वालों की तुलना उड़ी हमले के शहीदों से करना गलत है।
पोल में 16.66% फीसदी यानी 1590 का जवाब था कि नोटबंदी में मरने वालों की तुलना उड़ी हमले के शहीदों से करना सही है। पोल में 1.9 फीसदी यानी 181 पाठकों ने कह नहीं सकते के विकल्प को चुना।