जलियांवाला बाग नरसंहार के 100 साल पूरे हो चुके हैं। 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के पर्व पर पंजाब में अमृतसर के जलियांवाला बाग में ब्रिटिश हुकूमत में ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर के आदेश पर निहत्थे बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों लोगों को गोलियों से भून दिया गया था। यह हत्याकांड सिर्फ ब्रिटिने के औपनिवेशिक राज की बर्बरता का ही परिचय नहीं देता, बल्कि इसने भारत के इतिहास की धारा को बदल दिया। इसी के बाद देश को ऊधम सिंह जैसा क्रांतिकारी मिला और भगत सिंह समेत कई युवाओं के दिलों में देशभक्ति की लहर दौड़ गई थी।
हाल ही में ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीजा मे ने ब्रिटिश संसद में जलियांवाला बाग हत्याकांड पर अफसोस जताया है। टेरीजा मे ने कहा, 'जो भी हुआ था और उससे लोगों को जो पीड़ा हुई उसका हमें बेहद अफसोस है।' उन्होंने इस घटना को ब्रिटिश-भारतीय इतिहास में शर्मनाक दाग बताया था। इससे पहले मंगलवार को इस घटना को लेकर ब्रिटेन सरकार द्वारा माफी मांगने के प्रस्ताव रखा गया था, जिसपर वहां बहस हुई। लगभग सभी सांसदों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। हालांकि, ब्रिटिश सरकार के एशिया-प्रशांत क्षेत्र मामलों के मंत्री मार्क फील्ड ने इस घटना को लेकर संसद में संवेदना तो जताई थी, लेकिन माफी मांगने से इनकार कर दिया था।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या आपको लगता है कि जलियांवाला बाग नरसंहार पर ब्रिटेन को भारत से माफी मांगनी चाहिए?'
पोल के जवाब में हमें कुल 3,474 वोट मिले। इनमें 91.94 फीसदी (3194 वोट) पाठकों ने माना कि जलियांवाला बाग नरसंहार पर ब्रिटेन को भारत से माफी मांगनी चाहिए। जबकि 8.06 फीसदी (280 वोट) पाठकों ने सवाल के जवाब में असहमति जताते हुए कहा कि जलियांवाला बाग नरसंहार पर ब्रिटेन को भारत से माफी नहीं मांगनी चाहिए।