कंप्यूटर बाबा समेत पांच संतों को राज्य मंत्री का दर्जा देकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नए विवाद में फंस गए हैं। सरकार के फैसले के खिलाफ अब हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में याचिका दाखिल कर दी गई है। वहीं कांग्रेस ने भी इस फैसले पर सवाल उठाते कहा है कि बाबाओं को मंत्री का दर्जा देना शिवराज सरकार की कमजोरी को दिखाता है।
बता दें कि कंप्यूटर बाबा के साथ इंदौर के भय्यू महाराज, अमरकंटक (नर्मदा उद्गम) के हरिहरानंदजी, डिंडोरी के नर्मदानंदजी और पंडित योगेंद्र महंत को राज्य मंत्री पद का दर्जा देने वाला आदेश राज्य सरकार की ओर से मंगलवार को जारी किया गया। इस फैसले के बाद से सरकार और मुख्यमंत्री के फैसले पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि सरकार ने यह फैसला चुनावी फायदे को देखते हुए लिया है।
इस विषय पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'क्या संतों को राज्यमंत्री का दर्जा देने से मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा को लाभ मिलेगा?' सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कुल 2832 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। 47.95 फीसदी (1358 वोट) पाठकों ने माना कि संतों को राज्यमंत्री का दर्जा देने से मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा को लाभ मिलेगा। जबकि 52.05 फीसदी (1474) पाठकों ने माना कि संतों को राज्यमंत्री का दर्जा देने से मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा को लाभ नहीं मिलेगा।