बुधवार को जब सबरीमाला मंदिर के कपाट खुले तो विरोध ने उग्र रूप धारण कर लिया। दर्शन करने जा रही महिला श्रद्धालुओं को प्रदर्शनकारियों ने रोक दिया। केवल इतना ही नहीं महिलाओं और महिला पत्रकारों पर हमला भी किया गया। विरोध जताते हुए सबरीमाला संरक्षण समिति ने गुरुवार को राज्यभर में 12 घंटे बंद का आह्वान किया है।
भाजपा, अतंरराष्ट्रीय हिंदू संगठन सहित अन्य संगठनों ने इस बंद को अपना समर्थन दिया है। वहीं निल्लकल, पंबा, एल्वाकुलम, सन्निधनम में धारा 144 लागू कर दी गई है। इन इलाकों में चार से ज्यादा लोग एक साथ खड़े नहीं हो सकते। धारा 144 का उल्लंघन करते हुए प्रदर्शन करने को लेकर भाजपा की युवा शाखा के छह कार्यकर्ताओं को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने सबरीमला जाने के मुख्य प्रवेश मार्ग निलक्कल में धरना दे रहे और नारेबाजी कर रहे भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के सदस्यों को वहां से हटा दिया।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश रोकना सही है?'
पोल के जवाब में हमें कुल 6,285 वोट मिले। इनमें 52.35 फीसदी (3,290 वोट) पाठकों ने माना कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश रोकना गलत है, जबकि 47.65 फीसदी (2,995 वोट) पाठकों ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश रोकने को जायज ठहराया है।