अमेरिका ने शनिवार की सुबह 4 बजे (स्थानीय समयानुसार) सीरिया की राजधानी दमिश्क, डूमा और होम्स पर टॉम हॉक्स क्रूज मिसाइलों से हमले किए। सीरिया में 7 अप्रैल को हुए रासायनिक हमले के जवाब में की गई इस कार्रवाई में ब्रिटेन और फ्रांस ने भी साथ दिया। सीरिया ने इसे बर्बर और क्रूर कार्रवाई बताते हुए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन भी बताया था।
सुबह होते ही सीरियाई नागरिक संयुक्त कार्रवाई के खिलाफ दमिश्क की सड़कों पर उतरे। वाशिंगटन के शीर्ष अधिकारी जोसेफ डनफोर्ड ने बताया था कि नाटो हमले में एक रासायनिक हथियार शोध केंद्र, एक भंडारण केंद्र और एक कमांड पोस्ट को निशाना बनाया गया। उनके मुताबिक, सीरिया ने हमले को नाकाम करने की कोशिश की, लेकिन हम कामयाब हुए। हमले के बाद अमेरिका के रक्षा सचिव जिम मैटिस ने कहा था कि फिलहाल अगले हमले की कोई योजना नहीं है।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या सीरिया पर अमेरिकी हमले के बाद आतंकवाद को पनाह देने वाले देश सुधरेंगे?'
पोल के जवाब में हमें कुल 1,846 वोट मिले। इनमें 47.24 फीसदी (872 वोट) पाठकों ने माना कि सीरिया पर अमेरिकी हमले के बाद आतंकवाद को पनाह देने वाले देश सुधरेंगे, जबकि 52.76 फीसदी (974 वोट) पाठकों ने सवाल के जवाब में असहमति जताते हुए कहा कि सीरिया पर अमेरिकी हमले के बाद भी आतंकवाद को पनाह देने वाले देश नहीं सुधरेंगे।