प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसान आंदोलन की पहली वर्षगांठ से ठीक सात दिन पहले शुक्रवार को तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा कर दी। गुरु नानकदेव की जयंती पर सुबह 9 बजे देश को संबोधित करते हुए पीएम ने किसानों से आंदोलन वापस लेने का भी आग्रह किया।
कृषि कानून वापस लेने के फैसले को लेकर किए गए अमर उजाला पोल के नतीजे चौंकाने वाले हैं। पोल में शामिल हुए प्रतिभागियों में से 71.7 फीसदी की राय है कि प्रधानमंत्री द्वारा कृषि कानून वापस लेने का एलान करने के बाद अब किसानों को आंदोलन समाप्त कर देना चाहिए। वहीं 28.3 फीसदी की राय है कि जब तक औपचारिक तरीके से कृषि कानून वापस नहीं हो जाता किसानों को आंदोलन समाप्त नहीं करना चाहिए।
पीएम मोदी ने शुक्रवार को जनता से माफी मांगते हुए कहा कि कृषि कानूनों की वापसी की सांविधानिक औपचारिकताएं 29 नवंबर से शुरू हो रहे संसद के शीत सत्र में पूरी की जाएंगी। पीएम ने कहा, सरकार, किसानों, खासकर छोटे किसानों के कल्याण के लिए, देश के कृषि जगत के हित में, गांव गरीब के उज्ज्वल भविष्य के लिए, सत्यनिष्ठा से, किसानों के प्रति समर्पण भाव से, नेक नीयत से कानून लेकर आई, पर इतनी पवित्र बात, पूर्ण रूप से शुद्ध, किसानों के हित की बात, हम कुछ किसानों को समझा नहीं पाए। पीएम ने कहा कि कृषि अर्थशास्त्रियों, वैज्ञानिकों व प्रगतिशील किसानों ने भी उन्हें समझाने का प्रयास किया।
इसके साथ ही पीएम मोदी ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को और प्रभावी बनाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए एक कमेटी बनाएंगे। कमेटी में केंद्र और राज्यों के प्रतिनिधि, किसान, कृषि वैज्ञानिक और कृषि अर्थशास्त्री होंगे। कमेटी जीरो बजट खेती व किसान के हित में निर्णय लेगी।
वहीं, भारतीय किसान यूनियन नेता राकेश टिकैत ने कहा, सरकार तीनों कानून संसद में वापस ले और एमएसपी पर गारंटी वाला कानून लेकर आए, तभी आंदोलन समाप्त होगा। अभी आधी मांग ही पूरी हुई है। दोनों मांगें पूरी होने के बाद ही हम जश्न मनाएंगे।