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MP Samwad 2025: वॉटर वुमन शिप्रा पाठक जल संवर्धन पर रखेंगी अपने विचार, होगी जल है तो कल पर बात

Mon, 23 Jun 2025 05:03 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

'अमर उजाला संवाद' का कारवां भारत के हृदय यानी मध्य प्रदेश पहुंच रहा है। राजधानी भोपाल में 26 जून को होने वाले इस संवाद में अलग-अलग क्षेत्रों की हस्तियां शामिल होंगी। कार्यक्रम में जल संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रही हस्तियों को भी सम्मानित किया जाएगा।
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शिप्रा पाठख - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विकास से जुड़ी नीतियां, अर्थव्यवस्था, सिनेमा, खेल और अध्यात्म जैसे विषयों पर सारगर्भित चर्चा के लिए पहचाने जाने वाले 'अमर उजाला संवाद' का मंच पहली बार मध्य प्रदेश में सजने जा रहा है। 26 जून को राजधानी भोपाल के ताज लेकफ्रंट होटल में यह 'संवाद' होगा, जहां अलग-अलग क्षेत्रों की हस्तियां जुटेंगी और मध्य प्रदेश के विकास समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगी। इस कार्यक्रम में वॉटर वुमन शिप्रा पाठक भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराएंगी और जल संवर्धन से जुड़े मामलों पर अपने विचारों से दर्शकों को रूबरू कराएंगी। उनके साथ 'जल है तो कल है' विषय पर बात होगी। अमर उजाला अपने इस कार्यक्रम में जल संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रही हस्तियों को सम्मानित भी करेगा। 
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कौन हैं शिप्रा पाठक?
शिप्रा उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में स्थित दातागंज की रहने वाली हैं। उनके पिता डॉ. शैलेश पाठक स्थानीय नेता हैं। दादी संतोष कुमारी पाठक विधायक रह चुकी हैं। शिप्रा खुद एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। उन्होंने इंग्लिश लिट्रेचर से पोस्ट ग्रैजुएट किया और इसके बाद सामाजिक सारोकार से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगीं। शिप्रा ने नदियों और पर्यावरण की रक्षा के लिए कई अभियानों का नेतृत्व किया है। इनमें सबसे प्रमुख अयोध्या से रामेश्वरम के लिए 3952 किलोमीटर की पैदल यात्रा- रामजानकी वनगमन यात्रा रही है। उनकी यह यात्रा 108 दिन चली थी और वे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक होकर तमिलनाडु के रामेश्वरम तक पहुंचीं। रास्ते में उन्होंने सरयू, गंगा, यमुना, सरस्वती, मंदाकिनी, तुंगभद्रा, कृष्णा, गोदावरी और वैगई नदियों जल एकत्रित किया और इसी जल से भगवान रामेश्वरम का जलाभिषेक कर पूरे देश को नदियों के संरक्षण का संदेश दिया।

शिप्रा इससे पहले जल संरक्षण की यात्रा कर चुकी हैं, तब उन्हें वाटर वुमेन कहा गया था। शिप्रा मां नर्मदा की 3600 किमी लंबी परिक्रमा कर चुकी हैं। इसके अलावा मानसरोवर परिक्रमा, मां शिप्रा परिक्रमा, सरयू पद यात्रा और ब्रज चौरासी कोसी पद यात्रा कर शिप्रा नदियों के संरक्षण पर जोर देती रही हैं। कुल मिलाकर वे अब तक जल और पर्यावरण संरक्षण के लिए 13 हजार किलोमीटर से ज्यादा की पदयात्राएं कर चुकी हैं। उनकी संस्था पंचतत्व से 15 लाख लोग जुड़े हैं, जिनके सहयोग से नदियों के किनारे 25 लाख पौधे लगाए गए हैं।

अपना कारोबार और नौकरी छोड़कर नदियों और जंगलों को बचाने का संकल्प लेने वाली शिप्रा खुद ही वॉटर वुमेन बनने की अपनी कहानी अमर उजाला से साझा कर चुकी हैं। उन्होंने बताया है कि बचपन से ही जल के प्रति उनका बहुत प्रेम था। माता-पिता ने नाम भी शिप्रा रखा जो एक नदी का नाम है। वे कंपनी के काम से जब विदेश जाती थीं तो देखती थी कि वहां की नदियां कितनी स्वच्छ हैं। वहां तो नदियों को देवी नहीं माना जाता। हमारी नदियां ऐसी क्यों नहीं है। 

शिप्रा के मुताबिक, भारत में नर्मदा की परिक्रमा ने मेरा मन बदला। मैंने देखा मां नर्मदा जहां-जहां दूषित हैं, वहां लोगों का अर्थ भी बिगड़ा हुआ है, स्वास्थ्य भी बिगड़ा हुआ है और जहां वह अविरल बह रही हैं वहां विकास दिखाई देता है। यहीं से वैराग्य हुआ। शिप्रा की यात्रा की, गोमती की यात्रा की, फिर अयोध्या से रामेश्वरम तक की यात्रा की। हमारा उद्देश्य नए भारत की परिकल्पना नहीं, बल्कि प्राचीन भारत को ही जीवित रखना है। हमें आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति से अवगत कराना होगा। शिप्रा को उत्तर प्रदेश से लेकर गुजरात और महाराष्ट्र तक कई पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा जा चुका है। इसके अलावा वो एक मशहूर मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं। 
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इन हस्तियों का होगा सम्मान
भोपाल में होने वाले अमर उजाला संवाद में पर्यावरण संरक्षण की बात होगी। इसके साथ ही जल संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रही हस्तियों को सम्मानित भी किया जाएगा। सम्मानित होने वाली हस्तियों में खुद शिप्रा पाठक भी शामिल हैं। शिप्रा के साथ ही पर्यावरण संरक्षण का कार्य कर रहे डॉ. आरके पालीवाल, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रहकर बीते 25 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मुहिम चला रहे उमाशंकर तिवारी,  भोपाल की प्राकृतिक संपदा को संजोने का काम कर रहे  राशिद नूर खान और सुरेश एमजी को भी सम्मानित किया जाएगा। 
 
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