अमर उजाला बतरस एक और हफ्ते आम लोगों की जिंदगी से जुड़े अहम मुद्दे के साथ हाजिर है। इस हफ्ते पॉडकास्ट में चर्चा के केंद्र में तो बच्चों की परीक्षा का मुद्दा रहा, पर इसे लेकर अभिभावकों की मानसिकता और चुनौतियों को लेकर अहम बात हुई। दरअसल, बदलते और आधुनिक होते जमाने के साथ बच्चों के आसपास का माहौल और उनकी परवरिश लगातार बदल रही है। ऐसे में माता-पिता और अभिभावकों के सामने नई-नई चुनौतियां आ रही हैं। खासकर अब परीक्षाओं के नतीजे और रैंक भी अभिभावकों के लिए साख का सवाल बनती जा रही है। एंकर नंदिता कुदेशिया ने इस हफ्ते बतरस में इन्हीं चुनौतियों को लेकर दो विशेषज्ञों से बात की और जाना कि आखिर पैरेंट्स इनसे निपटने के लिए क्या कर सकते हैं।
इस पूरे पॉडकास्ट को आप शनिवार रात आठ बजे अमर उजाला के सभी सोशल मीडिया हैंडल्स पर सुन सकते हैं।
नंदिता कुदेशिया ने अमर उजाला के स्टूडियो में जिन दो विशेषज्ञों से चर्चा की, उनमें नोएडा के प्रॉमिनेंस वर्ल्ड स्कूल की प्रिंसिपल डॉ मृणालिनी सिंह और पैरेंटिंग कोच संदीप शामिल रहे। दोनों ही विशेषज्ञों ने कई अहम सवालों के जवाब दिए। मसलन- बच्चों का रिजल्ट और रैंक अब स्टेटस और साख का सवाल क्यों बन रहा? आजकल के अभिभावकों को बच्चों के अंक क्यों इतना परेशान करते हैं? क्या जो खुद नहीं कर पाए वो बच्चों पर थोपते हैं अभिभावक? क्या बच्चों की पढ़ाई को लेकर नई पीढ़ी के अभिभावक ज्यादा संजीदा हो रहे हैं?
बतरस में विशेषज्ञों ने न सिर्फ इन सवालों के जवाब दिए, बल्कि यह भी बताया कि क्या मां-बाप इन दिनों नंबर की होड़ में बच्चों पर प्रेशर ज्यादा डालते हैं? अभिभावकों की काउंसलिंग में क्या कुछ बताया जाना चाहिए? अभिभावक अपने बच्चे के लिए 'लक्ष्मण रेखा' कैसे तय करें? जिंदगी की चुनौतियों से लड़ने के लिए बच्चों की नींव को कैसे मजबूत करें? आज के समय में प्रोफेशनल काउंसलिंग कितनी जरूरी है? बच्चे नंबरों के दबाव में खुद को नुकसान न पहुंचाएं इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? बच्चे की खुशी या अंकों का बेहतर होना बच्चे के लिए क्या होता है जरूरी?