सार
Amar Ujala Batras: अमर उजाला बतरस के ताजा एपिसोड में जानें कि क्या सोशल मीडिया रील्स ज्योतिष के नाम पर डर फैला रही हैं। एंकर नंदिता कुदेशिया के साथ डॉ. एच.एस. रावत और अंशुल मल्होत्रा से समझें अंधविश्वास, ज्योतिष और ऑनलाइन बिकते 'भविष्य' की सच्चाई।
सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करते हुए अक्सर आपकी नजर ऐसी रील्स पर पड़ जाती होगी, जो एक पल के लिए आपको डरा दे। 'ये मत करो, वो मत करो' जैसी हिदायतों के बीच ज्योतिष आज मार्गदर्शन का जरिया है या फिर डर फैलाने का नया धंधा बन गया है? अमर उजाला बतरस में इस हफ्ते इसी ज्वलंत मुद्दे पर चर्चा हुई। एंकर नंदिता कुदेशिया ने इस हफ्ते बतरस में ज्योतिष के व्यवसायीकरण, रील्स के जरिए फैलाए जा रहे डर और सोशल मीडिया पर फैलते भ्रम को लेकर दो विशेषज्ञों से बात की और जाना कि आखिर मार्गदर्शन और डर के बीच क्या अंतर है।
इस पूरे पॉडकास्ट को आप शनिवार रात आठ बजे अमर उजाला के सभी सोशल मीडिया हैंडल्स पर सुन सकते हैं।
नंदिता कुदेशिया ने अमर उजाला के स्टूडियो में जिन दो विशेषज्ञों से चर्चा की, उनमें जाने-माने ज्योतिषाचार्य डॉ. एचएस रावत और ज्योतिषाचार्य अंशुल मल्होत्रा शामिल रहे। दोनों ही विशेषज्ञों ने कई अहम और तीखे सवालों के जवाब दिए। मसलन- क्या रील देखकर घबराना सही है? ज्योतिष को आज के वैज्ञानिक संदर्भ में कैसे देखा जाना चाहिए? क्या बिना मेहनत के केवल उपाय करने से व्यक्ति सफल हो सकता है? और सबसे अहम, एआई (AI) और एप्स से निकली कुंडलियां कितनी भरोसेमंद हैं?
बतरस में विशेषज्ञों ने न सिर्फ इन सवालों के जवाब दिए, बल्कि यह भी बताया कि राशिफल को ही संपूर्ण ज्योतिष मान लेने वालों की संख्या क्यों बढ़ रही है। डर बेचकर ज्योतिष का धंधा करने वालों से आम इंसान कैसे बचे। इसके अलावा ज्योतिष विद्या की विश्वसनीयता बनाए रखने में ज्योतिषाचार्यों की कितनी जिम्मेदारी है। चर्चा में यह भी साफ किया गया कि क्या सोशल मीडिया ज्योतिष को नुकसान पहुंचा रहा है और सही ज्योतिषाचार्य की पहचान कैसे की जाए, ताकि उनके उपाय वाकई कारगर सिद्ध हों।