अमर उजाला बतरस एक और हफ्ते आम लोगों की जिंदगी से जुड़े अहम मुद्दे के साथ हाजिर है। इस हफ्ते पॉडकास्ट में चर्चा हुई डिजिटल युग में मुश्किल में पड़ती निजता की। दरअसल, लंबे समय से यह चर्चाएं चलती आ रही हैं कि आधुनिक समय में प्राइवेसी सिर्फ एक मिथक है और सोशल मीडिया के जमाने में निजता जैसा कुछ भी नहीं है।
बतरस में एंकर नंदिता कुदेशिया ने इस हफ्ते डिजिटल दुनिया में निजता यानी प्राइवेसी की इसी अवधारणा को लेकर दो मेहमानों से स्टूडियो में चर्चा की और जाना कि आखिर यह समस्या कितनी गंभीर है और इसका सामना कैसे किया जा सकता है।
इस पूरे पॉडकास्ट को आप शनिवार रात आठ बजे अमर उजाला के सभी सोशल मीडिया हैंडल्स पर सुन सकते हैं।
अमर उजाला के स्टूडियो में इस डोमेन से जुड़े जिन दो विशेषज्ञों से बात की गई, उनमें दिल्ली साइबर सेल के असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर राहुल चौधरी और साइबर ठगी के शिकार आनंद करवा शामिल रहे। दोनों ने ही कई अहम सवालों के जवाब दिए। मसलन- क्या इस डिजिटल दुनिया में लोगों की सभी बातें रिकॉर्ड हो रही हैं? फोन की इस सेटिंग से खतरे में आप? कैसे फोन निजता भंग करते हुए खुद जासूस बनता जा रहा है?
विशेषज्ञों ने न सिर्फ इन सवालों के जवाब दिए, बल्कि यह भी बताया कि साइबर फ्रॉड क्या होता है क्यों आजकल लोग इसमें फंस रहे हैं? साइबर फ्रॉड में फंसे पीड़ित की कहानी से क्या सीख सकते है? अपनी प्राइवेसी को इस साइबर जाल की दुनिया में कैसे बचाएं? अपने बारे में कितनी जानकारी सोशल पर साझा करें? एप्स और डाउनलोड की दुनिया में कैसे सावधानी रखनी चाहिए? इसके अलावा फ्रॉड, धोखा, ऑनलाइन ठगी इन सब पर कैसे लगाम लगे क्या कानून बनने चाहिए?