अमर उजाला बतरस एक और हफ्ते आम लोगों की जिंदगी से जुड़े अहम मुद्दे के साथ हाजिर है। इस हफ्ते पॉडकास्ट में चर्चा हुई दो लोगों के बीच सहमति से बनाए गए संबंधों की उम्र सीमा पर। दरअसल, अदालत में इस उम्र सीमा को निर्धारित करने के एक मामले की सुनवाई चल रही है। केंद्र सरकार इस पर अपनी प्रतिक्रिया कोर्ट को दे चुकी है। अब अदालत के फैसले के बाद कुछ मानक या तो बदलने वाले हैं या पुनर्स्थापित हो जाएंगे। एंकर नंदिता कुदेसिया ने इस हफ्ते बतरस में इन्हीं चुनौतियों को लेकर दो विशेषज्ञों से बात की और जाना कि सहमति से संबंध बनाने की उम्र सीमा का मसला क्या है और इसका क्या प्रभाव है।
इस पूरे पॉडकास्ट को आप शनिवार रात आठ बजे अमर उजाला के सभी सोशल मीडिया हैंडल्स पर सुन सकते हैं।
नंदिता कुदेसिया ने अमर उजाला के स्टूडियो में जिन दो विशेषज्ञों से चर्चा की, उनमें अधिवक्ता-लेखक भुवन रिभु और यौन रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रशांत जैन शामिल रहे। दोनों ही विशेषज्ञों ने कई अहम सवालों के जवाब दिए। मसलन- सहमति की उम्र 16 हो या 18 इस पर विवाद क्यों है? 16 साल में क्या बच्चे मानसिक रुप से इसे समझने के लायक होते हैं? सहमति की उम्र पर विवाद शुरू कहां से हुआ? 18 से कम उम्र में सहमति का अधिकार देना कितना सही?
बतरस में विशेषज्ञों ने न सिर्फ इन सवालों के जवाब दिए, बल्कि यह भी बताया कि सामाजिक पृष्ठभूमि का कितना असर इस तरह की बातों में होता है। इस तरह के कानून बनने पर क्या और कैसा असर होगा। इस मुद्दे पर पाश्चात्य जीवन शैली को अपनाना सही होगा या गलत। इसके अलावा इस विषय पर बच्चों को स्कूल से जागरूक करना कितना जरूरी है।