अमर उजाला बतरस एक और हफ्ते नए एपिसोड के साथ हाजिर है। इस हफ्ते पॉडकास्ट पर चर्चा का विषय है- दास्तानगोई। कहा जाता है कि दास्तनागोई एक कला है। ऐसी कला जो आज से कई सौ साल पहले अरब दुनिया से शुरू हुई और देखते ही देखते पूरी दुनिया में प्रचलित हो गई। शौर्य और साहस के कार्यों के इर्द-गिर्द बुनी गईं ये कहानियां अलग-अलग परंपराओं तक फैलीं, हालांकि इन्हें असल लोकप्रियता मिली 19वीं सदी के भारत में। तब दास्तानगोई उर्दू भाषा से मिली और उत्तर भारत में खासा जानी पहचानी गईं। हालांकि, जैसे-जैसे आधुनिक काल पूरी दुनिया में फैला, वैसे-वैसे भारत में यह कला अपने खात्मे की तरफ बढ़ चली।
हालांकि, अब एक बार फिर उत्तर भारत में इस कला पर प्रमुखता से चर्चाएं होने लगी हैं। मशहूर एंकर और पत्रकार ऋचा अनिरुद्ध ने इस हफ्ते दास्तानगोई को लेकर कुछ अहम पहलुओं पर पॉडकास्ट में चार विशेषज्ञों से चर्चा की। दास्तानगोई की कला को आगे बढ़ाने वाले दास्तानगो- हिमांशु वाजपेयी, फौजिया, प्रज्ञा और रितेश ने ऋचा के सामने अपने विचार रखे।
इस पूरे पॉडकास्ट को आप शनिवार रात आठ बजे अमर उजाला के सभी सोशल मीडिया हैंडल्स पर सुन सकते हैं।