देश के 179 जिलों, छह राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों से प्रकाशित होने वाला ‘अमर उजाला’ अपने 22 संस्करणों के जरिये करोड़ों पाठकों का चहेता बना हुआ है, लेकिन यहां तक की यात्रा सुगम नहीं रही। 18 अप्रैल, 1948 को जब अखबार को पहला अंक प्रकाशित हुआ तो ये वो दौर था जब देश में ब्रिटिश शासन के दौरान स्थापित अंग्रेजी दैनिक अखबारों का वर्चस्व था। ऐसे में अमर उजाला का प्रकाशन इस सोच के साथ शुरू हुआ कि आजादी के बाद नागरिकों में सामाजिक जागरूकता लाने के साथ-साथ जिम्मेदारी की भावना भी भरी जाए ताकि एक नए भारत का निर्माण संभव हो सके। प्रकाशन के 75 वर्ष पूर्ण होने पर भी अमर उजाला अपने इस ध्येय में पक्षपातरहित, निडर और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के जरिये जुटा हुआ है। हमारे उच्च मानक वाली संपादकीय सामग्री पर पाठकों का भरोसा अटूट है। एक छोटे से भवन से शुरू हुआ सफर इस भरोसे के दम पर अखबार के 6 करोड़ पाठकों के अतिरिक्त amarujala.com और अमर उजाला एप पर 5 करोड़ से अधिक वैश्विक पाठकों, 45 लाख यूट्यूब सब्सक्राइबर्स, 10 लाख इंस्टाग्राम और 21 लाख ट्विटर फॉलोवर्स तक भी पहुंच चुका है।
भारतीय भाषाओं के सामूहिक स्वप्न के सम्मान में अमर उजाला फाउंडेशन ने शब्द सम्मानों की स्थापना की है। सर्वोच्च ‘आकाशदीप’ अलंकरण हिंदी और अन्य भारतीय भाषा के एक-एक साहित्य मनीषी को पांच-पांच लाख रुपये की राशि, प्रशस्ति पत्र और गंगा प्रतिमा के साथ अर्पित किया जाता है। इस क्रम में अब तक हिंदी के लिए विश्वनाथ त्रिपाठी, ज्ञानरंजन, नामवर सिंह तथा शेखर जोशी के साथ ही, गिरीश कारनाड (कन्नड़), भालचंद्र नेमाड़े (मराठी), शंख घोष (बांग्ला) तथा प्रतिभा राय (उड़िया) को सम्मान दिया जा चुका है।
अमर उजाला के नवोन्मेषक श्री अतुल माहेश्वरी की स्मृति में दी जा रही छात्रवृत्ति से अब तक हजारों बच्चों ने अपने सपने पूरे किए हैं। इसके तहत प्रति वर्ष देशभर के 43 बच्चों को 16.90 लाख रुपये की छात्रवृत्ति दी जाती है।
श्री डोरीलाल अग्रवाल राष्ट्रीय मेधावी दिव्यांग छात्रवृत्ति : इस छात्रवृत्ति से देश के हजारों दिव्यांगों के जीवन की दिशा बदली।
महिलाओं की प्रतिभा को मंच देने और उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने के लिए अमर उजाला के सभी संस्करणों में सालभर ढेरों गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।
पुलिस की पाठशाला : स्कूली छात्राओं को सुरक्षा व आत्मविश्वास के गुर बताने के लिए एसएसपी रैंक के अफसर करते हैं कार्यशाला।
अमर उजाला फाउंडेशन ने हेस्को के साथ मिलकर बांदल घाटी (उत्तराखंड) के 8 गांवों के विकास का जिम्मा लिया। महिला कल्याण, सशक्तीकरण व शिक्षा, कौशल विकास और आजीविका के अवसर पैदा कर क्षेत्र के लोगों के समग्र विकास पर फोकस किया गया है।