विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि यह हमेशा स्पष्ट होना चाहिए कि मौजूदा सरकार 'भारत-पहले' नीति का पालन करती है। उन्होंने कहा कि किसी भी फैसले की असली कसौटी यही होनी चाहिए कि वह राष्ट्र के हित में है या नहीं।
यह बात उन्होंने डीडी इंडिया को 'विदेश नीति के 12 साल' पर दिए एक इंटरव्यू में कही। उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में कूटनीति का एक अहम हिस्सा यह है कि प्रमुख ताकतों के बीच अपने देश की स्थिति को कैसे बेहतर बनाया जाए, जो आसान काम नहीं है।
चीन-अमेरिका से संबंधों पर क्या कहा?
चीन और अमेरिका के साथ संबंधों में बदलाव से जुड़े सवालों के जवाब में जयशंकर ने कहा, अमेरिका आज खुले तौर पर 'अमेरिका पहले' नीति की बात करता है और भारत को भी स्वतंत्र रूप से 'भारत-पहले' नीति पर स्पष्ट रहना चाहिए।
'टैरिफ से प्रभावित हुए सभी देश'
उन्होंने कहा, अमेरिका ने दुनिया के साथ अपने जुड़ाव के तरीकों में कई बदलाव किए हैं। लेकिन कई मामलों में इसका भारत पर सीधा असर नहीं पड़ा, क्योंकि भारत उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) का सदस्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी देश टैरिफ, बाजार तक पहुंच और अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय संगठनों तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर रुख से प्रभावित हुए हैं।
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'चीन के साथ पहले जैसे नहीं संबंध'
चीन के बारे में उन्होंने कहा कि सीमा क्षेत्रों में 2020 से शांति और स्थिरता प्रभावित हुई थी। लेकिन पिछले एक साल में हालात कुछ हद तक सुधरे हैं। राजनीतिक संबंधों में सुधार हुआ है। हालांकि, यह पहले जैसे नहीं हुए हैं।
उन्होंने कहा, रूस और जापान के साथ संबंध स्थिर हैं, जबकि यूरोप के साथ संबंधों में इस साल काफी सुधार हुआ है। जयशंकर ने यह भी कहा कि सभी कूटनीतिक संबंधों में सबसे बड़ा सुधार यूरोप के साथ हुआ है, जहां एफटीए और रणनीतिक साझेदारी ने सहयोग को पहले से कहीं अधिक मजबूत किया है।