Digha Jagannath Temple: पश्चिम बंगाल सरकार ने दीघा स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर से धाम शब्द हटाने का फैसला किया है और इसका नाम अब 'श्री श्री जगन्नाथ सांस्कृतिक केंद्र' रखा जाएगा। यह निर्णय ओडिशा सरकार की मांग के बाद लिया गया। पढ़िए रिपोर्ट-
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार दीघा में बने राज्य की ओर से वित्तपोषित भगवान जगन्नाथ मंदिर और सांस्कृतिक परिसर से 'धाम' शब्द हटाएगी। इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पिछले साल अप्रैल में हुई थी, जब ममता बनर्जी मुख्यमंत्री थीं।
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अधिकारी ने बताया, अब इस परिसर का नाम 'श्री श्री जगन्नाथ सांस्कृतिक केंद्र' होगा। यहां भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की मूर्तियों की पूजा तय नियमों और परंपराओं के अनुसार की जाएगी। अधिकारी ने बताया कि यह फैसला ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की ओर से की गई औपचारिक मांग के बाद लिया गया।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए माझी ने तत्काल और परंपरा का सम्मान करने वाला कदम उठाने के लिए शुभेंदु अधिकारी का धन्यवाद किया। ओडिशा के मुख्यमंत्री की ओर से यह आधिकारिक अनुरोध भाजपा सांसद संबित पात्रा ने दिया था, जो पुरी से लोकसभा सांसद हैं।
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सनातन के नियमों के अनुसार होगा पूजा-पाठ: शुभेंदु अधिकारी
अधिकारी ने कहा कि उन्होंने हाल ही में इस्कॉन के मायापुर स्थित मुख्यालय में साधुओं से मंदिर के नाम को लेकर बातचीत की थी। उन्हें लगा कि यह नाम भारत की सनातन परंपरा के अनुसार नहीं है। उन्होंने कहा कि परिसर से 'धाम' शब्द हटा दिया जाएगा और पूजा-पाठ सनातन नियमों के अनुसार ही होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अब मंदिर का नाम 'श्री श्री जगन्नाथ देव मंदिर' होगा।
अधिकारी के अनुसार, सरकार के कैबिनेट प्रस्ताव और टेंडर दस्तावेजों में पहले इसे केवल 'सांस्कृतिक केंद्र' कहा गया था और उसमें 'धाम' शब्द नहीं था। बाद में यह शब्द जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही इस नाम पर विवाद था। पिछली सरकार ने सनातन भावनाओं का अपमान किया था।
भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि दुनियाभर में भगवान जगन्नाथ के करोड़ों भक्त इस नाम से आहत थे। इनमें करीब 4.5 करोड़ ओड़िया लोग शामिल हैं। यह हिंदू भावनाओं से खिलवाड़ हो रहा था।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के अनुसार आदि शंकराचार्य ने चार धाम की परंपरा स्थापित की थी, जिसमें पुरी का जगन्नाथ मंदिर शामिल है। इसलिए इसमें नया 'धाम' जोड़ने का कोई प्रावधान नहीं है।
पात्रा ने यह भी कहा कि बंगाल सरकार की ओर से नया जगन्नाथ स्थल बनाना स्वागत योग्य है।
दीघा में बना यह जगन्नाथ मंदिर परिसर पुरी के 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर की तरह बनाया गया था। इसकी प्राण प्रतिष्ठा 30 अप्रैल 2025 को हुई। कार्यक्रम में ममता बनर्जी भी पहुंची थीं।
ओडिशा के मुख्यमंत्री माझी ने क्या कहा?
ओडिशा के मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि यह निर्णय दोनों राज्यों के बीच भाईचारे को मजबूत करेगा। ओड़िया अस्मिता व भगवान जगन्नाथ की गरिमा की रक्षा करेगा। उन्होंने भगवान जगन्नाथ को पूरे विश्व की आत्मा और भारत की सांस्कृतिक पहचान का सबसे बड़ा प्रतीक बताया। उन्होंने पिछली सरकार पर आरोप लगाया कि उसने 'जगन्नाथ धाम' नाम का गलत उपयोग किया।