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बुलेट ट्रेन ट्रैक के किनारे चलेंगे वाहन, सड़क निर्माण की योजना तैयार

Wed, 15 Nov 2017 10:13 AM IST
नवनीत शरण, नई दिल्ली
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बुलेट ट्रेन ट्रैक के किनारे वाहन भी फर्राटा भर सकेंगे। रेल ट्रैक के किनारे चार मीटर चौड़ी सड़क का भी निर्माण करने की योजना तैयार की गई है। यह एलिवेटेड रोड होगा जो पिलर पर तैयार किया जाएगा।
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इसके अलावा इस प्रोजेक्ट की खासियत यह होगी कि टनल ट्यूब में आने-जाने वाले दो ट्रैक का निर्माण किया जाएगा। यह अपने तरह का अलग टनल होगा जिसमें एक साथ दो ट्रेन पूरी रफ्तार में चल सकेंगी।

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की रफ्तार तेज होने लगी है। नेशनल हाई स्पीड कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचसीएल) ने ट्रैक के किनारे सड़क निर्माण की योजना तैयार की है। हालांकि यह सड़क सभी के लिए नहीं होगी। इसमें उन ग्रामीण इलाकों को वाहन चलाने की अनुमति होगी जिनकी भूमि अधिग्रहीत की जाएगी। उनसे किसी तरह का टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा।
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एनएचसीएल के प्रबंधक अचल खरे ने बताया कि 12 में से 10 स्टेशनों के निर्माण के लिए राज्य सरकार को दस्तावेज सौंपने का काम पूरा कर लिया गया है। इस प्रोजेक्ट पर अगले साल जुलाई महीने से बापी, सूरत, बलसाड, वडोदरा के बीच 233 किलोमीटर ट्रैक का काम भी शुरू कर दिया जाएगा। 4 टनल बनाने के लिए डिजाइनिंग का काम भी शुरू कर दिया गया है। मुंबई-ठाणे के बीच 21 किलोमीटर टनल की डिजाइनिंग पहली बार अप-डाउन दोनों ट्रेन के लिए की गई है। इसका फायदा यह होगा कि टनल के बाहर ट्रेन रोकने की आवश्यकता नहीं होगी।
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वडोदरा में बनेगा सैंपल ट्रैक

बुलेट ट्रेन ट्रैक बनाने के पहले एक सैंपल ट्रैक का भी निर्माण किया जाएगा। वडोदरा में 75 मीटर का यह ट्रैक तैयार किया जाएगा जिस पर ट्रेनिंग दी जाएगी। इसका फायदा यह होगा कि लोको पायलट को न तो ट्रेनिंग के लिए जापान भेजने की जरूरत होगी और न ही ट्रेन चलाने में किसी तरह की परेशानी होगी।

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14-15 हजार लोगों की जमीन का अधिग्रहण होगा
रेलवे ने बुलेट प्रोजेक्ट के लिए 14-15 हजार लोगों की जमीन अधिग्रहीत किए जाने का अनुमान लगाया है। इसके लिए मुआवजा देने के साथ ही उन्हें बिना टोल टैक्स दिए ट्रैक के किनारे बने हुए सड़क पर वाहन चलाने की अनुमति दी जाएगी।

460 किमी पर जापान व भारत मिलकर करेंगे ट्रैक निर्माण 
508 किलोमीटर कुल ट्रैक निर्माण में 460 किलोमीटर निर्माण कार्य भारत व जापान मिलकर करेंगे। इसके अलावा अन्य टेढ़े-मेढ़े रास्तों पर जापानी विशेषज्ञ ही निर्माण कार्य करेंगे।
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