हाईकोर्ट में अपर न्यायमूर्ति के पद की शपथ लेने वाले न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने अपने पिता न्यायमूर्ति दिवंगत प्रेमशंकर गुप्त के पद चिह्नों पर चलते हुए न सिर्फ हिंदी में शपथ ग्रहण की बल्कि पहला निर्णय भी हिंदी में ही सुनाया।
शपथ ग्रहण के बाद न्यायमूर्ति अशोक कुमार हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति वीके शुक्ल के साथ खंडपीठ के सदस्य के रूप में बैठे। यह न्यायपीठ मिसलेनियस रिट का क्षेत्राधिकार रखती है।
उन्होंने एक मुकदमे में हिंदी में निर्णय लिखाया, जिसकी अधिवक्ताओं के बीच खासी प्रशंसा रही।