न्यायमूर्ति एनवी रमण, न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की पीठ ने इस मसले का परीक्षण करने का निर्णय लेते हुए यूपी सरकार, समेत अन्य को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। युवती की वकील दुष्यंत पराशर ने पीठ से कहा कि युवती ने अपने प्रेमी से अपनी मर्जी के साथ शादी की है। उसने मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयान (धारा-164 के तहत) में भी कहा था कि बिना किसी दबाव के उसने निकाह किया है और वह अपने पति के साथ रहना चाहती है। बावजूद इसके शादी को शून्य करार देना और उसे अयोध्या के नारी निकेतन में रखने का आदेश, गैरकानूनी और असंवैधानिक है। उन्होंने युवती को नारी निकेतन में रखने को अवैध डिटेंशन करार दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसा करना मौलिक अधिकारों का हनन है।
आखिर 16 वर्ष की आयु में ही क्यों निकाह करना पड़ा युवती को
युवती का आरोप है कि वह पिछले दो वर्ष से एक मुस्लिम लड़के से प्यार करती थी, लेकिन पिता उसकी शादी तीन-चार बच्चे वाले एक शख्स के साथ करना चाहते थे। लिहाजा वह घर से भाग गई और उसने अपने प्रेमी के साथ निकाह कर लिया।
निकाह को लेकर क्या कहता है मुस्लिम कानून
- युवक व युवती 15 वर्ष की आयु (रजोस्वला) पार कर चुके हों
- दोनों मुस्लिम हों
- निकाह में प्रस्ताव व मंजूरी हो, दो गवाह की मौजूदगी हो
- मेहर व उपहार
- प्रतिबंधित रिश्ते से अलग हो