लोकसेवा आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष अनिरुद्ध सिंह को पद से हटाने और उनकी नियुक्ति की जांच कराने की मांग को लेकर दाखिल याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। याचिका दाखिल कर कहा गया था कि लोक सेवा आयोग के महत्वपूर्ण पद पर एक यादव (अनिल कुमार यादव) की नियुक्ति अवैधानिक पाते हुए हाईकोर्ट द्वारा रद्द की जा चुकी है।
इसके बाद पुन: सरकार ने अनिरुद्ध सिंह यादव को आयोग का अध्यक्ष बना दिया। याचिका फतेहपुर के जिलेदार सिंह ने दाखिल की थी। इस पर न्यायमूर्ति कृष्णमुरारी और न्यायमूर्ति राघवेंद्र कुमार की खंडपीठ ने सुनवाई की। याची का कहना था कि लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनिल कुमार यादव के कार्यकाल में आयोग की नियुक्तियों में व्यापक पैमाने पर धांधली की गई। एक जाति विशेष के लोगों को गलत तरीके अपनाकर नियुक्त किया गया।
अनिल यादव की नियुक्ति रद्द होने के बाद सरकार ने फिर से एक यादव को ही आयोग की कुर्सी सौंप दी। इसी प्रकार से सरकार ने लोकायुक्त जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी पहले जस्टिस रवींद्र सिंह यादव और फिर जस्टिस वीरेंद्र सिंह यादव को नियुक्त करने का प्रयास किया। प्रदेश सरकार यादव के बाद यादव की नियुक्ति पर आमादा है। इसकी जांच कराई जानी चाहिए। सरकार के अधिवक्ता ने बताया कि हाईकोर्ट द्वारा लोक सेवा आयोग अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए गाइड लाइन बनाने का आदेश दिया गया था।
उक्त आदेश के क्रम में आयोग अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए नियम बना दिए गए हैं। उसी के तहत मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सर्च कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने बाकायदा विज्ञापन निकालने और योग्य उम्मीदवारों पर सभी पहलु से विचार करने के बाद पांच नाम मुख्यमंत्री के पास भेजे थे। इनमें से मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने अनिरुद्ध सिंह यादव के नाम की संस्तुति की है। कोर्ट ने याचिका आधारहीन पाते हुए खारिज कर दी।