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सलीम के दिल में बसते हैं अल्लाह और राम

Sun, 09 Oct 2016 01:45 AM IST
जगदीप कुमार/अमर उजाला, सहारनपुर
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रामलीला में सलीम उर्फ संजू - फोटो : Amar Ujala
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भले ही रामलीलाओं के मंचन को लोग मजहब से जोड़ने में जुटे हों, मगर सहारनपुर के सलीम 25 साल से अपने मन में अल्लाह के साथ राम को बसाए हुए हैं। सलीम रामलीलाओं में नारद मुनि, ताड़का समेत कई तरह के रोल कर रहे हैं। रामलीला में उनके बेजोड़ अभिनय के चलते दोनों मजहब के लोगों का प्यार भी खूब मिलता है। सलीम में 14 साल की उम्र से रामलीलाओं के मंचन को देखने और उनमें काम करने का जुनून रहा है।  
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टीटू कॉलोनी में भारतीय कला श्रीराम संगम समिति की ओर से आयोजित रामलीला में सलीम उर्फ संजू 25 साल से जुड़ा है। सलीम ने बताया कि वह सच्चा मुसलमान है, मगर साथ ही वह कलाकार भी है, जिसकी कोई जाति या धर्म नहीं होता। सलीम ने बताया कि उनके अलावा जीजा रहमान और अली खान भी रामलीलाओं में अभिनय करते आ रहे हैं। 

सलीम का कहना है कि भारत की संस्कृति हिंदू और मुसलमानों की मिलीजुली संस्कृति है। इसमें से किसी एक को अलग करके सशक्त राष्ट्र की कल्पना नहीं की जा सकती है। जो लोग इंसान को हिंदू या मुसलमान के चश्मे से देखते हैं, उनकी सोच बहुत छोटी है। उन्होंने नवाजुद्दीन को रामलीला में काम करने से रोकने को निंदनीय बताया। 
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आपको बता दें कि बॉलीवुड कलाकार और मुजफ्फरनगर निवासी नवाजुद्दीन सिद्दीकी को शिवसेना ने रामलीला में रोल करने से रोका है। इसके बाद से राष्ट्रीय स्तर पर बहस शुरू हो चुकी है। लोग इसके अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं। ज्यादातर लोग इसे मजहब से जोड़कर देख रहे हैं। ऐसे में यह बताना जरूरी है कि मुसलमान कलाकार पहली बार नहीं, बल्कि आजादी के बाद से लगातार रामलीलाओं में काम करते आ रहे हैं। सहारनपुर में भी ऐसे अनेक कलाकार हैं, जिनके दिल में अल्लाह और राम दोनों बसते हैं।
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गंगा में डुबकी भी लगाता है सलीम  

सलीम उर्फ संजू - फोटो : Amar Ujala
सलीम का कहना है कि रामलीला में रोल करने के लिए कुछ लोगों ने मना भी किया। मगर उसके दिल में अल्लाह के साथ ही राम भी बसते हैं। ऐसे में उसने किसी की नहीं सुनी। उसकी अम्मी मीना परवीन और अब्बू मोहम्मद अकबर ने उसे कभी नहीं रोका। उनका हमेशा से यह कहना रहा है कि अच्छाई जहां भी मिले उसे अपना लेना चाहिए। इस्लाम भाईचारे और दूसरे मजहबों का सम्मान करने की सीख देता है। अन्य धर्म भी यही सिखाते हैं। ऐसे में उन्हें रामलीलाओं में काम करना जरा भी गलत नहीं लगता।              

रामलीलाओं के नियमों के अनुसार सभी कलाकार रामलीला के शुरू होने से पहले अपने हाथों में कलावा बांधते हैं। दशहरा मनाए जाने के बाद सभी कलाकार गंगा नहाने के लिए हरिद्वार जाते हैं। वहां कलावा खोलकर गंगा में विसर्जित करते हैं, जिनमें सलीम भी शामिल है।             

भारतीय कला संगम श्रीरामलीला सभा के अध्यक्ष सतपाल कालड़ा ने कहा कि रामलीला को धर्म के आधार पर बांटना गलत है। रामलीला के मंच पर आने वाला कलाकार धर्म और जाति से ऊपर हैं। सलीम हमारी रामलीला का होनहार कलाकार है और 25 साल के अभिनय में कभी भेदभाव की बात भी सामने नहीं आई है। 
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