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गोवा नाइटक्लब अग्निकांड: तीनों मुख्य आरोपियों ने किया सरेंडर, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उठाया कदम

सार

गोवा के बिर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब अग्निकांड मामले में मुख्य आरोपी सौरभ लूथरा, गौरव लूथरा और अजय गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मापुसा अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। 6 दिसंबर 2025 को हुए अग्निकांड में 25 लोगों की मौत हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द किए जाने के खिलाफ उनकी याचिका खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट को सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया था।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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गोवा के चर्चित बिर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब अग्निकांड मामले में तीनों मुख्य आरोपियों ने सोमवार को मापुसा की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जमानत रद्द किए जाने को चुनौती देने वाली उनकी याचिकाएं खारिज किए जाने के करीब दो सप्ताह बाद नाइटक्लब के मालिक सौरभ और गौरव लूथरा तथा उनके कारोबारी साझेदार अजय गुप्ता ने मापुसा की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण किया। सर्वोच्च न्यायालय ने तीनों को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।

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अदालत ने स्वीकार किया आत्मसमर्पण, हिरासत आदेश जारी
आरोपियों की ओर से पैरवी कर रहीं अधिवक्ता सौम्या ड्रैगो ने बताया कि अदालत ने तीनों का आत्मसमर्पण स्वीकार कर लिया और जरूरी हिरासत आदेश जारी किए। उन्होंने कहा कि आरोपी सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार अदालत के समक्ष पेश हुए हैं।

नाइटक्लब में लगी भीषण आग में गई थी 25 लोगों की जान
उत्तर गोवा के अरपोरा स्थित बिर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब में 6 दिसंबर, 2025 को भीषण आग लग गई थी। इस दर्दनाक हादसे में 25 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए थे। बड़े पैमाने पर हुई इस जनहानि के बाद मामले ने पूरे देश का ध्यान खींचा था।
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चिकित्सकीय जरूरतों को लेकर भी अदालत में दी गई अर्जी
अधिवक्ता सौम्या ड्रैगो ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि आरोपियों के चिकित्सकीय इतिहास, डॉक्टरों की सलाह और चिकित्सा संबंधी अभिलेखों के आधार पर अदालत में कुछ चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर आवेदन भी दिया गया था। अदालत ने आरोपियों को जरूरी दवाइयां और गद्दा उपलब्ध कराने की मांग स्वीकार कर ली है।

विशेष जूते की मांग पर फिलहाल फैसला लंबित
आरोपियों के लिए विशेष प्रकार के जूते उपलब्ध कराने की मांग पर अदालत ने फिलहाल फैसला नहीं किया है। इस संबंध में अदालत ने जांच अधिकारी से जवाब मांगा है। अधिवक्ता के मुताबिक, इस मुद्दे पर अगले कार्यदिवस में सुनवाई होने की उम्मीद है।

31 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज की थी याचिका
सर्वोच्च न्यायालय ने 31 अगस्त को तीनों आरोपियों की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिनमें बंबई उच्च न्यायालय द्वारा उनकी जमानत रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। शीर्ष अदालत ने उन्हें दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। साथ ही विचारण अदालत को मामले की सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश भी दिया गया था।

बंबई उच्च न्यायालय ने 18 अगस्त को रद्द की थी जमानत
इससे पहले बंबई उच्च न्यायालय ने 18 अगस्त को तीनों आरोपियों को मिली जमानत रद्द कर दी थी। उच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता और आगे की कानूनी कार्यवाही की जरूरत को देखते हुए यह फैसला सुनाया था। इसके बाद तीनों आरोपियों ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया, लेकिन शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

आरोपपत्र में गंभीर धाराओं के तहत दर्ज हैं मामले
मामले में दाखिल आरोपपत्र के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की उन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जो हत्या की श्रेणी में न आने वाले गैर इरादतन मानव वध, मानव जीवन को खतरे में डालने वाले कृत्य, आग और ज्वलनशील पदार्थों को लेकर लापरवाही, जालसाजी, जाली दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल करने और आपराधिक साजिश से संबंधित हैं।

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‘गैर-जिम्मेदाराना कृत्यों’ से 25 मौतों का आरोप
आरोपपत्र में जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि आरोपियों के ‘गैर-जिम्मेदाराना कृत्यों’ के कारण इस सामूहिक जनहानि वाली घटना में 25 लोगों की जान चली गई। आरोपपत्र में कहा गया है कि इन मौतों से मृतकों के परिवारों को ‘अपूरणीय क्षति’ हुई है। मामले में अब तीनों आरोपियों के आत्मसमर्पण के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

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