बिहार के शेल्टर होम को लेकर टीआईएसएस ने जारी की रिपोर्ट।
बिहार के लगभग सभी शेल्टर होम में यौन शोषण की घटनाएं हुई हैं। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टीआईएसएस) की रिपोर्ट के मुताबिक, शेल्टर होम में बच्चों के साथ होने वाला व्यवहार परेशान करने वाला है। बिहार सरकार ने टीआईएसएस की इस अध्ययन रिपोर्ट को सार्वजनिक कर दिया है।
टीआईएसएस ने राज्य के शेल्टर होम पर सर्वे करने के बाद 2017 में बिहार सरकार को रिपोर्ट सौंप दी थी। अप्रैल, 2018 में 100 पेज की यह रिपोर्ट सामाजिक कल्याण विभाग को सौंपी गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में आरोपी बृजेश ठाकुर संदिग्ध हालातों में इसे चला रहा था। यहां लड़कियों के साथ हिंसा और यौन शोषण हुआ। 34 लड़कियों का मेडिकल कराने के बाद उनके साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई।
टीआईएसए के मुताबिक, बिहार में ओम साईं संस्थान के शेल्टर होम ‘सेवा कुटीर’ में लड़कियों के यौन शोषण की घटनाएं हुई हैं। यहां रहने वाली लड़कियों ने बताया कि उन्हें नौकरी का वादा करके लाया गया था। मोतीहारी में ‘निर्देश’ एनजीओ के शेल्टर होम में बड़े लड़के छोटे लड़कों का यौन शोषण करते हैं। ‘सखी’ संगठन, नॉवल्टी वेलफेयर सोसायटी, एनजीओ पनाह, ग्राम स्वराज सेवा संस्थान में भी ऐसे मामले देखे गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन शेल्टर होम का काम बच्चों की सहायता करना है, लेकिन यहां उनके साथ वर्षों से यौन शोषण और हिंसा हो रही है। यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर पीड़ितों को दिलाए।
बृजेश ठाकुर की न्यायिक हिरासत 12 तक बढ़ी
मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में बृजेश ठाकुर समेत 10 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 12 सितंबर तक बढ़ा दी गई है। सभी आरोपी रविवार को जेल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये विशेष पॉक्सो जज आरपी तिवारी की अदालत के समक्ष पेश हुए। ठाकुर ने जेल में अपनी जान को खतरा बताया, लेकिन कोर्ट ने इसे जेल प्रशासन का मामला बताते हुए दखल देने से इनकार कर दिया।