राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर कहा कि आदिवासी समुदायों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर काम करना ही बिरसा मुंडा और आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को राष्ट्र की सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस मौके पर उन्होंने एक लेख भी लिखा है, जिसमें उन्होंने इतिहास के गुमनाम नायकों को श्रद्धांजलि दी है। बिरसा मुंडा की जयंती जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाई जा रही है।
बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने के बाद राष्ट्रपति ने कहा, मुझे भरोसा है कि आदिवासी समुदायों के सर्वांगीण विकास के लिए काम करना ही बिरसा मुंडा और आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। यह मेरे लिए गर्व की बात है कि राष्ट्र्पति भवन ने आदिवासी समुदायों तक पहुंचने के लिए नई पहल की हैं।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने लेख में लिखा, कुछ समय पहले तक बिरसा मुंडा और अन्य आदिवासी नायक इतिहास में गुममान नायकों के रूप में जाने जाते थे। लेकिन अब उनके साहस और बलिदान की सराहना हो रही है। उन्होंने कहा, आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान हमने भारत की संस्कृति और उपलब्धियों का गौरवमयी इतिहास मनाया, जिससे युवाओं को उन महान स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान के बारे में जानने का मौका मिला, जिनके बारे में पहले कम जानकारी थी।
2021 में लिया गया था 'जनजातीय गौरव दिवस' मनाने का फैसला
बिरसा मुंडा की जयंती पर सरकार ने 2021 में फैसला लिया था कि इस दिन को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाएगा, ताकि आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद किया जा सके। मुर्मू ने कहा कि बिरसा मुंडा की विरासत को याद करना आदिवासी समुदायों के इतिहास को देश के इतिहास में एक मुख्य स्थान दिलाने का प्रयास है।
'आदिवासी समाज में सामूहिक भलाई निजी महत्वकांक्षाओं से ऊपर'
मुर्मू ने आदिवासी समुदायों की जीवनशैली को भी सराहा। उन्होंने कहा, आदिवासी समाज में सामूहिक भलाई को निजी महत्वकांक्षाओं से ऊपर रखा जाता है। यह समाज प्राकृतिक संसाधनों के साथ सामंजस्यपूर्ण तरीके से जीने का अद्वितीय उदाहरण पेश करता है और हमें इसे संजोकर रखना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि पिछले एक दशक में सरकार ने आदिवासी समुदायों को मान्यता देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें 'धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान' भी शामिल है, जिसका मकसद आदिवासी गांवों में सामाजिक बुनियादी ढांचों की कमी को दूर करना है।
'बिरसा मुंडा ने न्याय और सांस्कृतिक पहचान के लिए लड़ा युद्ध'
राष्ट्रपति ने कहा, बिरसा मुंडा का संघर्ष सिर्फ एक विद्रोह नहीं था, बल्कि यह न्याय और सांस्कृतिक पहचान के लिए लड़ा गया युद्ध था। उनका संघर्ष महात्मा गांधी की तरह सत्य और न्याय के लिए था। राष्ट्रपति ने अपनी बचपन की यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि वह और उनके दोस्त बिरसा मुंडा की कहानियों को सुनकर गर्व महसूस करते थे। उन्होंने कहा, बिरसा मुंडा का जीवन और उनका संघर्ष न केवल आदिवासी समुदायों के लिए बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है। राष्ट्रपति ने कहा कि बिरसा मुंडा का स्वतंत्रता, न्याय, पहचान और गरिमा का सपना हर युवा का सपना है, चाहे वह किसी भी समुदाय से हो।