अलग गोरखालैंड की मांग को लेकर लगभग तीन महीने से बेमियादी बंद और हिंसा से जूझ रहे दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में स्थिति सुधारने के लिए मंगलवार को सिलीगुड़ी में दूसरी सर्वदलीय बैठक होने वाली है। इस बैठक पर तमाम राजनीतिक दलों और आम लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।
पर्वतीय क्षेत्र के ज्यादातर दलों का कहना है कि उन्हें बैठक का औपचारिक न्योता नहीं मिला है। बावजूद इसके वे बैठक में हिस्सा लेंगे। गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने बैठक में शामिल होने की बात कही है, लेकिन मोर्चा से निष्कासित नेता विनय तमांग ने मोर्चा की मंशा पर सवाल उठाते हुए भूख हड़ताल शुरू करने की धमकी दी है।
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तमांग ने आरोप लगाया कि गोरखा मोर्चा नेतृत्व सर्वदलीय बैठक के मुद्दे पर आम लोगों को गुमराह कर रहा है। विमल गुरुंग ने पहले कहा था कि मोर्चा 12 सितंबर की बैठक में हिस्सा नहीं लेगा, लेकिन अब महासचिव रोशन गिरि ने दावा किया है कि मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल बैठक में हिस्सा लेगा। उन्होंने कहा कि मोर्चा नेतृत्व के इस असमंजस की वजह से आम लोगों को तीन महीने से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उधर, गोरखा मोर्चा की केंद्रीय समिति के सदस्य स्वराज थापा ने बताया कि सर्वदलीय बैठक में एक प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला पहले ही हो चुका है। इसलिए इस मुद्दे पर भ्रम की कोई गुंजाइश नहीं है।
गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) ने भी बातचीत शुरू होने के बाद भूख हड़ताल पर जाने के तमांग के फैसले पर सवाल उठाया है। जीएनएलएफ महासचिव महेंद्र छेत्री ने उम्मीद जताई कि दूसरे दौर की बैठक का नतीजा सकारात्मक होगा।