हॉलिवुड फिल्मों की अगर बात की जाए तो उन्हें न केवल अमेरिका बल्कि दुनिया के बाकी देशो में भी खूब देखा जाता है। एक बात और, जिसपर शायद ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता ... इन हॉलिवुड फिल्मों में जब भी चीन का जिक्र होता है तो उसकी एक सकारात्मक तस्वीर पेश करने की कोशिश की जाती है। इसका सबसे बड़ा उहादरण है 2015 में बनी फिल्म पिक्सल। इस फिल्म के निर्माता एलियन्स को चीन की दीवार तोड़ते हुए दिखाना चाहते थे। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
स्टूडियो के एक लीक ईमेल से पता चला कि निर्माता के इस आइडिया से सोनी कंपनी के अधिकारी चिंतित थे। उन्हें लग रहा था कि चीन में फिल्म को रिलीज करने में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा सकता है। इसके बाद निर्माता को न चाहते हुए भी फिल्म में ग्रेट वॉल ऑफ चाइना की जगह भारत के ताजमहज को तोड़ते हुए दिखाना पड़ा।
भारत की गलत तस्वीर दिखा सकते हैं पर चीन की नहीं, क्यों?
तो आखिर ऐसा क्यों होता है कि हॉलिवुड फिल्मों में भारत की तस्वीर चाहे जैसे मर्जी दिखाई जाए लेकिन चीन की गलत तस्वीर नहीं दिखनी चाहिए? इसका उत्तर है चीन का बॉक्स ऑफिस। जी हां, चीन का बॉक्स ऑफिस दुनियाभर के फिल्म उद्योगों पर गहरा प्रभाव डालता है। एक न्यूज वेबसाइट के अनुसार अगर कोई हॉलिवुड फिल्म अपने स्थानीय थियेटरों में नहीं चलती, वह भी चीन में खूब कमाई करती है।
शायद यही वजह है कि चीन को किसी हॉलिवुड फिल्म में विलेन के तौर पर नहीं दिखाया जाता। ऐसा ही एक अन्य फिल्म रेड डाउन में किया गया। इसमें पहले तो चीन को दुश्मन के तौर पर दिखाया गया, जिन्होंने अमेरिका पर हमला किया। लेकिन बाद में खूब पैसा खर्च करके फिल्म से चीन का जिक्र ही हटा दिया और उसकी जगह उत्तर कोरिया को दिखाया गया।
ये बात चीन के राष्ट्रपति भी दोहरा चुके हैं कि चीन की कहानी को अच्छी तरह से दिखाया जाए। एक न्यूज वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार साल 2013 से लेकर अब तक सबसे ज्यादा कमाई करने वाली करीब 41 फिल्मों को चीन ने ही फाइनेंस किया है।