हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि मल्टी रोल एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) ध्रुव एमके III ने इजिप्ट इंटरनेशनल एयरशो-2024 में अल अलामीन के रेगिस्तान में अपनी उड़ानों और क्षमताओं से लोगों का दिल जीत लिया। इस कार्यक्रम में मिस्र में भारत के राजदूत अजीत गुप्ते भी इंडिया पैवेलियन में आए, जहां उन्होंने एचएएल और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) के स्टॉल का दौरा किया। भारतीय रक्षा कंपनियों की भागीदारी ग्लोबल एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में भारत की बढ़ती मौजूदगी को उजागर करती है। भारत की रक्षा क्षमताएं लगातार बढ़ रही हैं, साथ ही सरकार स्वदेश में ही डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए भी बड़ा कदम उठा रही है।
हाल ही में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) से खरीद (भारतीय) श्रेणी के अंतर्गत भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के सुखोई-30 एमकेआई विमान के लिए 240 एयरो-इंजन (एएल-31एफपी) की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसकी अनुमानित लागत 26,000 करोड़ रुपये है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन एयरो-इंजनों की डिलीवरी एक साल बाद शुरू होगी और ऑर्डर को पूरा होने में आठ साल का वक्त लगेगा। इन इंजनों में 54 फीसदी से ज्यादा पार्ट्स स्वदेशी होंगे। इनका निर्माण एचएएल के कोरापुट डिवीजन में किया जाएगा। सुखोई-30 MKI भारतीय वायुसेना के सबसे शक्तिशाली और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बेड़े में से एक है। एचएएल की तरफ से इन एयरो-इंजनों की आपूर्ति भारतीय वायुसेना के बेड़े की जरूरतों को पूरा करेगी।
ध्रुव हेलीकॉप्टर की खासियतों को देखते हुए लैटिन अमेरिका से लेकर अफ्रीका, पश्चिम और दक्षिण पूर्व एशिया के करीब 35 देशों ने इसमें अपनी रूचि जाहिर की है। वहीं कई देशों ने इसका प्रदर्शन देखने की भी इच्छा जताई है। ध्रुव को किसी भी मौसम में और पहाड़ी, दुर्गम व बीहड़ क्षेत्रों में भी तैनात किया जा सकता है। एएलएच ध्रुव एमके III यूटी (यूटिलिटी) हेलीकॉप्टर को रेस्क्यू और बचाव, सैन्य परिवहन, आंतरिक कार्गो, रेकी/हताहत निकासी के लिए डिजाइन किया गया है। इस हेलिकॉप्टर ने सियाचिन ग्लेशियर और लद्दाख जैसे हाई एल्टीट्यूड इलाकों में भी शानदार प्रदर्शन किया है।