दो दशक से ज्यादा से नगालैंड में जारी शांति प्रक्रिया आखिरी चरण में पहुंचने के साथ ही इलाके में तनाव भी बढ़ता जा रहा है। केंद्र सरकार ने 31 अक्तूबर तक समझौते पर हस्ताक्षर की बात कही है। इस बीच, सोमवार को केंद्र सरकार और एनएससीएन-आईएम प्रतिनिधियों के बीच फिर वार्ता हुई। इस दौरान अलग झंडे और संविधान सहित कुछ संवेदनशील मुद्दों पर बात हुई।
नगालैंड के पुलिस महानिदेशक टी. जान लांगकुमार ने कहा, पुलिस की सात बटालियन को रिजर्व रखा गया है। दो महीने का राशन और ईंधन जमा कर लिया गया है। मणिपुर के उखरूल जिले में प्रशासन ने संबंधित विभाग को जरूरी सामान जमा करने का निर्देश दिया है। ताकि समझौते के बाद अशांति या प्रतिकूल स्थिति पैदा होने पर खाद्यान्न की दिक्कत न हो। नगालैंड के बाहर सबसे ज्यादा नगा मणिपुर में ही हैं। यहां प्रशासन ने इंफाल पश्चिमी जिले के सभी पुलिसवालों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। एनएससीएन (आई-एम) की पहली मांग नगा-बहुल क्षेत्रों के एकीकरण की है। मणिपुर हमेशा इसके खिलाफ रहा है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि कई नगा गुट शांति समझौते से सहमत नहीं हो सकते हैं। इसके अलावा एनएससीएन का इसाक-मुइवा के रुख को लेकर अनिश्चितता है। अलग झंडे व संविधान की मांग खारिज होने के बाद वह समझौते के लिए तैयार होगा या नहीं, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। यह भी साफ नहीं है कि केंद्र ने नगा-बहुल इलाकों के एकीकरण की मांग पर सहमति जताई है या नहीं।