उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यूपी में शराबंबंदी से साफ तौर पर इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश में शराब पर पाबंदी लगाना संभव नहीं है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शराबबंदी पर सरकार की नीति स्पष्ट करते हुए कहा कि शराब को अचानक बंद नहीं कर सकते।
यूपी में शराबबंदी पर पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में अखिलेश यादव ने कहा कि शराब में गन्ने का भी इस्तेमाल होता है ऐसे कैसे शराब को बंद कर सकते हैं। कहा कि इस बारे में भी सोचना पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ने की खेती से लाखों किसान जुड़े हैं। उनके हित के बारे में भी सोचना होगा। इसलिए शराब पर पाबंदी अभी जल्दबाजी होगी।
हालांकि मुख्यमंत्री ने लोगों को शराब न पीने की भी सलाह दी। सीएम वह 450 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करने के बाद मंच से उतर कर पत्रकारों के सवाल का जवाब दे रहे थे।
बुनकरों की बदहाली से जुड़े सवाल पर सीएम ने कहा कि हम बुनकरों के हित में बड़ा कदम उठाने के बारे में सोच रहे हैं। जल्द ही 60 साल से अधिक उम्र के बुनकरों को 500 रुपये पेंशन दी जाएगी। इसके लिए सरकार व्यवस्था कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनहित से जुड़ी हर सहूलियत का ख्याल रखा जाएगा। चार साल तक विकास किया है, आगे भी मौका मिला तो करेंगे।
रविवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बनारस में एक कार्यक्रम में शिरकत करने आए थे।
नीतीश ने अखिलेश को दी थी शराबबंदी की सलाह
मालूम हो कि अभी कुछ दिन पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यूपी दौरे के दौरान अखिलेश सरकार को बिहार की तर्ज पर यूपी में भी शराब बंदी की सलाह दी थी। नीतीश कुमार ने कहा कि अखिलेश जी घबराइए नहीं, यूपी में शराबबंदी लागू कीजिए। 16 हजार करोड़ के राजस्व के लिए जनता की गाढ़ी कमाई के 60 हजार करोड़ रुपये बर्बाद मत कीजिए।
बता दें कि मुख्यमंत्री पद संभालने के तुरंत बाद नीतीश कुमार ने 26 नवंबर को मद्य निषेध दिवस पर एक अप्रैल 2016 से बिहार में शराबबंदी लागू करने की घोषणा की। एक्साइज एक्ट में संशोधन कर अवैध शराब बनाने व बेचने वालों को मृत्युदंड और शराब पीकर उत्पात मचाने वालों को 10 साल तक की सजा का प्रावधान भी किया।