विधानसभा में करारी हार के बाद उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव प्रदेश की सपा राजनीति पर काबिज होने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर सपा का सबसे बड़ा चेहरा बनने की कोशिश में जुट गए हैं। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अपने दो दिन के दिल्ली दौरे के दौरान खुद को राष्ट्रीय राजनीति में मुलायम सिंह यादव की जगह खड़ा करने की कवायद में लगे रहे।
उन्होंने ममता बनर्जी, शरद पवार और कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं से सपा के राष्ट्रीय नुमाइंदे के तौर पर मुलाकात की। वहीं विपक्ष के बड़े नेताओं ने भी अखिलेश से सपा का सर्वेसर्वा के तौर पर मुलाकात की। इन मुलाकातों के जरिये अखिलेश ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि भविष्य में मोदी सरकार के खिलाफ बनने वाले राष्ट्रीय मोर्चे में वह सपा की ओर से प्रतिनिधित्व करेंगे।
अभी तक मुलायम सिंह यादव सपा की राष्ट्रीय राजनीति का चेहरा थे। लोकसभा और राज्यसभा में सपा का अहम मुद्दों पर स्टैंड, केंद्र सरकार का विरोध या फिर समर्थन जैसे तमाम अहम फैसले वही लेते थे। मगर चुनाव आयोग में सपा की साइकिल जीतने के बाद शायद उन्होंने भी अब अपनी पुरानी भूमिका से खुद को अलग कर लिया है।
सपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अब सपा का संसद में विभिन्न मुद्दों पर क्या स्टैंड होगा और आगामी राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति चुनाव में पार्टी की क्या भूमिका होगी। इन सब मुद्दों पर अखिलेश यादव ही अंतिम निर्णय लेंगे।
अखिलेश यादव ने सोमवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और देर शाम एनएसपी प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की। संसद भवन में वह कांग्रेस नेताओं गुलाम नबी आजाद, अहमद पटेल से भी मुलाकात की।
सूत्रों ने बताया कि ममता बनर्जी ने अखिलेश यादव से मुलाकात कर मोदी सरकार के खिलाफ राष्ट्रीय मोर्चा बनाने को लेकर बातचीत की। अखिलेश ने भी ममता को इस संबंध में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया है। सूत्रों ने बताया कि आने वाले दिनों में इस संबंध में दिल्ली में एक संयुक्त रैली का आयोजन हो सकता है।