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अखिलेश यादव और अमर सिंह के रिश्ते की पूरी कहानी

Mon, 24 Oct 2016 08:57 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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फाइल फोटो - फोटो : Social Media
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके पिता मुलायम सिंह के खासमखास अमर सिंह के रिश्ते कितना बिगड़ चुके हैं, ये अब खुलकर सामना आ गया है। समाजवादी परिवार में चल रही कलह के बीच रविवार को अखिलेश यादव ने अपने आवास पर पार्टी नेताओं की बैठक बुलाई और अपने चाचा शिवपाल यादव समेत चार मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। 
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सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव पार्टी में चल रही उठापटक को लेकर भावुक हो गए और अमर सिंह को 'भला बुरा' भी कहा। अमर सिंह को अखिलेश यादव का भला बुरा कहना दोनों के बीच बिगड़ते रिश्तों का चरम है। इसी बैठक में अखिलेश यादव ने अपने चाचा के साथ अमर सिंह के करीबी लोगों को भी बर्खास्त करने का फैसला लिया। इनमें अमर सिंह की अंतरंग मित्र जयाप्रदा भी शामिल हैं। जयाप्रदा को उत्तर प्रदेश फिल्म डेवलपमेंट काउंसिल के पद से हटा दिया गया। बैठक से बाहर आए सपा नेताओं ने भी मीडिया से बात करते हुए अमर सिंह को भला बुरा कहा और जमकर अपनी भड़ास निकाली।

हालांकि ऐसा नहीं है कि अमर सिंह के साथ अखिलेश के रिश्ते हमेशा से खराब रहे हैं.. मुलायम के मुख्यमंत्रित्व काल में जब अमर सिंह सपा सुप्रीमो के खास हुआ करते थे, अखिलेश उन्हें अंकल कहकर बुलाते थे। हालांकि 2007 में मुलायम के विधानसभा चुनाव हारने के बाद अखिलेश सैफई के आंगन से निकल यूपी के सियासी मैदान में खड़े हो गए हैं.. पढ़िए अखिलेश और अमर सिंह के रिश्ते की पूरी कहानी..  
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देवगौड़ा और मुलायम के बीच दुभाषिए अमर सिंह

- फोटो : amar ujala
- बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक मुलायम-अमर के रिश्ते की नींव एचडी देवगौड़ा के प्रधानमंत्री बनने के साथ शुरू हुई थी। देवगौड़ा हिंदी नहीं बोल पाते थे और मुलायम अंग्रेजी नहीं, ऐसे में देवगौड़ा और मुलायम के बीच दुभाषिए की भूमिका अमर सिंह ही निभाते थे. तब से शुरू हुआ ये साथ अब तक जारी है। 

- एक समय में समाजवादी पार्टी में अमर सिंह की हैसियत ऐसी थी कि उनके चलते आजम खान, बेनी प्रसाद वर्मा जैसे मुलायम के नजदीकी नाराज होकर पार्टी छोड़ गए, लेकिन मुलायम का अमर पर भरोसा बना रहा।

- अमर सिंह और अखिलेश के रिश्तों में सबसे ज्यादा मिठास डिंपल के साथ उनकी शादी के समय थी। दरअसल, कहा जाता है कि अखिलेश और डिंपल की शादी के लिए मुलायम सिंह यादव पहले तैयार नहीं थे, लेकिन ये अमर सिंह ही थे जिन्होंने मुलायम को इस शादी के लिए तैयार किया।

- 2010 में अमर सिंह को समाजवादी पार्टी से बाहर निकाल दिया गया। हालांकि 2016 में उनकी एक बार फिर समाजवादी पार्टी में वापसी हुई और अमर के सपा में वापस आने के साथ ही समाजवादी परिवार में कलह शुरू हो गई। 

अमर सिंह का फोन भी नहीं उठाते अखिलेश

- फोटो : अमर उजाला
- हाल में आई खबरों में कहा गया कि अखिलेश यादव, अमर सिंह का फोन भी नहीं उठाते हैं। समाजवादी परिवार में मची कलह के लिए अखिलेश ने 'बाहरी लोगों'  को जिम्मेदार ठहराया था, समझा गया कि अखिलेश का इशारा अमर सिंह की ओर था। 

- इसके बाद अमर सिंह ने अखिलेश को अपने बेटे जैसा और मुलायम सिंह को अपना भाई बताया। अमर सिंह के शब्द थे, 'अखिलेश मेरे बेटे की तरह हैं। मैं उसे शुभकामनाएं और अपना प्यार दे सकता हूं। वो भले ही मुझसे नाखुश हो पर मैं उससे नहीं हो सकता।'

- अखिलेश का अमर सिंह के प्रति विरोध जगजाहिर था, लेकिन सपा में उनकी वापसी का रामगोपाल यादव और आजम खान ने विरोध किया, लेकिन अमर सिंह राज्यसभा पहुंच गए। 

- सब ठीक चल रहा था, लेकिन जया प्रदा के बहाने अमर सिंह ने अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और अपने साथ उन्होंने शिवपाल यादव को भी लपेट लिया कि अखिलेश शिवपाल सहित मुलायम के साथियों की नहीं सुन रहे हैं। 

- इसके बाद अखिलेश यादव ने जया प्रदा को यूपी फिल्म डेवलपमेंट काउंसिल में सीनियर वाइस चेयरपर्सन बनाया।

पार्टी के बाद सरकार में घुसने लगे अमर सिंह

- पार्टी में घुसने के बाद अमर सिंह अखिलेश यादव की सरकार में भी घुसने की कोशिश करने लगे। नवभारतटाइम्स की खबर के मुताबिक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के न चाहते हुए भी दीपक सिंघल को मुख्य सचिव बनवाने में अमर सिंह ने अहम भूमिका निभाई। एक पार्टी के टेप ने यह राज खोल भी दिया। 

- जब मुलायम सिंह ने अखिलेश को यूपी पार्टी अध्यक्ष पद से हटाया, तो कहा गया कि अमर सिंह के कहने पर ही मुलायम ने यह फैसला लिया है। इसके बाद अखिलेश यादव ने उस समय मुख्य सचिव रहे दीपक सिंघल को हटा दिया, जबकि शिवपाल यादव के विभाग छीन लिए। 

- समाजवादी परिवार में चल रही कलह पर एक नेता की प्रतिक्रिया कुछ इस तरह थी, 'अमर सिंह इस बात को समझने में फेल हुए हैं कि उन्हें उतनी छूट नहीं मिल सकती जितनी कि मुलायम सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए मिलती थी और तब अखिलेश यादव बच्चे थे।'

- सपा में दोबारा वापसी के बाद अमर सिंह को यह एहसास हो गया कि सपाई परिवार में बहुत सारे लोग उनके विरोध में हैं। ऐसे में उन्होंने शिवपाल से दोस्ती बढ़ाई। पारिवारिक कलह के लिए अखिलेश के 'बाहरी लोगों' को जिम्मेदार ठहराने पर शिवपाल अमर सिंह के बचाव में थे। मुख्यमंत्री के बयान के बाद पार्टी कार्यकर्ता 'बाहरी लोगों' के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे। 

 
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अब मुलायम के पाले में है गेंद

फाइल फोटोः मुलायम ‌सिंह यादव - फोटो : amar ujala
- पिछले कुछ समय से समाजवादी परिवार में जबरदस्त घमासान चल रहा है और अखिलेश यादव इस घमासान के एक पक्ष हैं, उनके साथ रामगोपाल और पार्टी के अन्य नेता हैं, तो अमर सिंह शिवपाल और मुलायम के साथ हैं। स्थितियां ऐसी बन गई है कि अखिलेश अपने पिता और चाचा के खिलाफ खड़े दिख रहे हैं और इन सबके लिए अखिलेश यादव, अमर सिंह को जिम्मेदार मानते हैं। हालांकि अखिलेश यादव सार्वजनिक मंचों से लगातार कहते रहे हैं कि मैं अपने पिता के खिलाफ नहीं हूं। 

- समाजवादी परिवार में बढ़ते मतभेद के बीच अखिलेश यादव ने एक ही वार में शिवपाल और अमर सिंह को कई झटके दिए हैं और अब गेंद मुलायम सिंह के पाले में है और उन्हें भाई (शिवपाल), दोस्त (अमर सिंह) और बेटे (अखिलेश) को साधकर फैसला लेना है। सपा सुप्रीमो का फैसला ही समाजवादी परिवार की एकजुटता को तय करेगा.. वरना सैफई कुनबे का बिखरना तय लग रहा है। 

- मुलायम सिंह के खासमखास दोस्त के अतीत को देखते हुए कहा जा सकता है कि जिनके दोस्त अमर सिंह हो, उन्हें दुश्मनों की क्या जरूरत। अमर सिंह का एक अतीत ये भी रहा है कि वे जिनके साथ रहे हैं, उनका घर टूटा है। बच्चन भाईयों के अलावा अंबानी भाईयों में भी बंटवारा हो गया है। ये पहलू 'समाजवादी परिवार' को परेशान करने वाला है, लेकिन ये भी हो सकता है ये महज संयोग की ही बात हो।
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