चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, रायजोर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई ने शिवसागर विधानसभा सीट पर एक बार फिर जीत हासिल की है। असम में विपक्ष के खेमे से वह अकेले ऐसे बड़े नेता हैं, जो अपनी सीट बचाने और चुनाव जीतने में सफल रहे।
लगातार दूसरी बार जीती शिवसागर सीट
अखिल गोगोई ने लगातार दूसरी बार शिवसागर सीट जीती है। उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार कुशल दुवारी को 17,272 वोटों के अंतर से हराया। गोगोई को कुल 86,521 वोट मिले, जबकि कुशल दुवारी के पक्ष में 69,249 वोट पड़े। वहीं, एनडीए की सहयोगी पार्टी एजीपी के प्रदीप हजारिका को 14,757 वोट मिले। 126 सदस्यों वाली असम विधानसभा में रायजोर दल ने कुल दो सीटें जीती हैं। दूसरी सीट ढिंग से महबूब मुख्तार ने जीती, जिन्होंने 71,494 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की।
अखिल गोगोई ने अक्टूबर 2020 में रायजोर दल बनाया था। वह असम में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ हुए आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे हैं। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान दिसंबर 2019 में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उन पर यूएपीए (UAPA) के तहत मामला चला और उन्होंने 567 दिन जेल में बिताए।
ये भी पढ़ें: Suvendu Adhikari Defeats Mamata Banerjee: शुभेंदु अधिकारी ने ममता को फिर हराया
2021 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा था चुनाव
गोगोई ने साल 2021 का विधानसभा चुनाव जेल के अंदर से ही निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा और जीत हासिल की। वह बिना किसी शारीरिक प्रचार के जेल से चुनाव जीतने वाले पहले असमिया नेता बने। इसके अलावा, वह असम विधानसभा के पहले ऐसे सदस्य बने जिन्होंने कैदी विधायक के रूप में कोर्ट की विशेष अनुमति लेकर शपथ ली।
जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने विधानसभा में भाजपा सरकार की नीतियों का कड़ा विरोध किया। कई मौकों पर उनकी मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के साथ तीखी बहस भी हुई। गोगोई ने सीएए, कथित फर्जी मुठभेड़ों, अल्पसंख्यकों की बेदखली और संसाधनों के निजीकरण जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा। वह असम की राजनीति में किसानों के अधिकारों, जनजातीय मुद्दों और नागरिक स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले एक प्रमुख नेता माने जाते हैं।
अखिल गोगोई की प्रोफाइल क्या है?
जोरहाट जिले में जन्मे अखिल गोगोई ने अंग्रेजी साहित्य की पढ़ाई की है। उनकी पत्नी गीताश्री तामुली एक कॉलेज शिक्षिका हैं और उनका एक बेटा है। गोगोई पहली बार 2002-2005 के दौरान तेंगानी भूमि अधिकार आंदोलन से चर्चा में आए थे। उन्होंने 2005 में कृषक मुक्ति संग्राम समिति (KMSS) बनाई। इस संगठन ने आरटीआई (RTI) का इस्तेमाल करके राशन और नरेगा के घोटालों का खुलासा किया। उन्होंने बड़े बांधों के खिलाफ भी आंदोलन किए और 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान से जुड़े। उनके काम के लिए उन्हें 2008 में 'षणमुगम मंजूनाथ इंटीग्रिटी अवार्ड' और 2010 में 'नेशनल आरटीआई अवार्ड' मिला।
अन्य वीडियो-