भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम का आज तीसरा दिन है। सीमा पर भले ही शांति हो लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव का माहौल बना हुआ है। सोमवार को एक बार फिर भारत की डीजीएमओ ने प्रेस ब्रीफ की है। जिसमें उन्होंने पाकिस्तान की एक किए गए कायराना हमलों की पोल खोल दी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि, पाकिस्तान की ओर से किए गए हमले की कोशिशों को रोकने के लिए किन हथियारों का इस्तेमाल किया गया।
#WATCH | Delhi | #OperationSindoor | Air Marshal AK Bharti says, "...Our battle-proven systems stood the test of time and take them head on. Another highlight has been the stellar performance of the indigenous air defence system, the Akash system. Putting together and… pic.twitter.com/SrkAdYiNiM
एके भारती ने कहा कि आज के आधुनिक युद्ध में नेटसेंट्रिक ऑपरेशनल क्षमता (यानि सभी हथियार और सैनिकों को एक नेटवर्क के जरिये जोड़कर साथ में लड़ने की ताकत) बहुत जरूरी हो गई है। इस पर काफी कुछ कहा और लिखा जा चुका है, खासकर नए सिस्टम्स के बारे में। लेकिन मैं यहां ये कहना चाहता हूं कि हमारे पुराने, लेकिन जंग में आजमाए हुए सिस्टम्स ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है। जैसे कि 'पेचोहा', 'ओएके' और 'लाला' तोपें- ये पुराने सिस्टम्स होते हुए भी पाकिस्तानी खतरे का डटकर सामना कर रहे हैं। दुश्मन के पास आधुनिक हथियार थे, लेकिन इन पुराने और विश्वसनीय हथियारों ने भी अपनी ताकत साबित की और सीधी टक्कर दी। एक और खास बात यह है कि हमारे देश में बने स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम 'आर्चर सिस्टम' ने भी शानदार प्रदर्शन किया है। मैं विशेष रूप से ये कहना चाहूंगा कि पिछले 10 सालों में इस ताकतवर एयर डिफेंस नेटवर्क को तैयार करना संभव हुआ है, और इसका श्रेय भारत सरकार को जाता है, जिसने लगातार बजट और नीति के स्तर पर पूरा समर्थन दिया है ताकि हम अत्याधुनिक हथियार और सिस्टम खरीद सकें।
कहीं भी जा सकता है आकाश
'आकाश' की सबसे बड़ी खासियत यह भी है कि यह कहीं भी ले जाया जा सकता है। इसे LoC या अन्य सीमा पर ट्रक या टैंक जैसे वाहनों के जरिए लेकर जाया जा सकता है। इसका एडवांस वर्जन आकाश-NG 70 से 80 किमी तक मार कर सकता है। इसकी रफ्तार लगभग 2,500 किमी/घंटा है। यह 150 किमी दूर तक 64 लक्ष्यों को देख सकता है। यह एक साथ 12 मिसाइलों को दाग सकता है। मिसाइल में स्मार्ट गाइडेंस सिस्टम है, जिससे आखिरी पल में भी लक्ष्य को लॉक करने में मदद मिलती है।
एक बैटरी 64 लक्ष्यों को ट्रैक, 12 पर कर सकती है हमला
'आकाश' में एक राजेंद्र 3डी पैसिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे रडार और चार लॉन्चर होते हैं। इनमें से प्रत्येक में तीन मिसाइलें होती हैं। यह सभी आपस में जुड़ी होती हैं। प्रत्येक बैटरी 64 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकती है और उनमें से 12 पर हमला कर सकती है।